पीएम मोदी की सोना न खरीदने की अपील का अर्थ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील एक साल तक सोना न खरीदें सिर्फ एक भावनात्मक या सांस्कृतिक संदेश
नहीं बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने
की बड़ी रणनीति मानी जा रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध जैसे हालात कच्चे तेल की महंगाई और डॉलर पर बढ़ते दबाव के बीच सरकार अब
देश की विदेशी मुद्रा बचाने की कोशिश में जुटी है। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयात करने वाले देशों में शामिल
है। देश में हर साल 700 से 800 टन सोने की मांग रहती है जबकि घरेलू उत्पादन
बेहद कम है। ऐसे में 90 प्रतिशत से ज्यादा
सोना विदेशों से आयात करना पड़ता है और इसका भुगतान डॉलर में किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत
सबसे ज्यादा डॉलर दो चीजों पर खर्च करता है कच्चा तेल और सोना। अगर दोनों की मांग
एक साथ बढ़ती है तो देश से बड़ी मात्रा में डॉलर बाहर जाता है। इसका सीधा असर
रुपये की मजबूती और महंगाई पर पड़ता है। सरकारी
आंकड़ों के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष में भारत ने सिर्फ सोना खरीदने के लिए करीब 72 बिलियन डॉलर खर्च किए जो कुल आयात बिल का लगभग 10 प्रतिशत था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देश में सोने की
खरीद 30 से 40
प्रतिशत
भी कम हो जाए तो अरबों डॉलर की बचत संभव है। दुनिया में जब भी युद्ध आर्थिक संकट या भू राजनीतिक तनाव बढ़ता है निवेशक शेयर बाजार और
करेंसी की जगह सोने को सबसे सुरक्षित निवेश मानते हैं। इसे सेफ हेवन कहा जाता है।
यही वजह है कि ईरान अमेरिका
और पश्चिम एशिया तनाव के बीच दुनियाभर में सोने की कीमतों में तेज उछाल देखा जा
रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार 2025 में दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने करीब 1000 टन सोना खरीदा। चीन भारत तुर्की और पोलैंड
जैसे देश लगातार अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं ताकि संकट के समय उनकी अर्थव्यवस्था
सुरक्षित रह सके। एक रिपोर्ट के
मुताबिक भारत के घरों मंदिरों और निजी तिजोरियों में करीब 25 हजार से 50 हजार टन सोना मौजूद
है। इसकी कुल कीमत भारत की GDP से भी ज्यादा बताई
जाती है। यही वजह है कि सरकार लंबे समय से गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम जैसी योजनाओं
के जरिए इस सोने को अर्थव्यवस्था में शामिल करने की कोशिश कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना दौरे के दौरान लोगों से
विदेशी मुद्रा बचाने की अपील करते हुए कहा कि देशहित में कुछ समय तक सोने की खरीद
कम करनी चाहिए। उनका कहना था कि तेल की कीमतों पर भारत का नियंत्रण नहीं है लेकिन सोने की खरीद
पर लोग खुद नियंत्रण रख सकते हैं। सरकार का मानना है कि
अगर लोग अनावश्यक सोने की खरीद कम करें तो डॉलर की बचत होगी रुपया मजबूत रहेगा और
महंगाई पर भी कुछ हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा। हालांकि विपक्ष ने इस बयान की आलोचना भी
की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार को आर्थिक संकट से निपटने के लिए ठोस
नीति बनानी चाहिए न कि जनता से त्याग की अपील करनी चाहिए।














