उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश की प्राइवेट यूनिवर्सिटीज की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने प्रदेश की सभी 52 निजी विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता और पारदर्शिता की जांच कराने का फैसला लिया है। इस उद्देश्य से राज्य उच्च शिक्षा परिषद ने 11 विशेष कमेटियों का गठन किया है  जो अगले एक महीने के भीतर सभी यूनिवर्सिटीज का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी। सरकार का कहना है कि इस निरीक्षण का उद्देश्य केवल नियमों के पालन की जांच करना नहीं  बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता  प्रशासनिक पारदर्शिता और छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं का मूल्यांकन करना भी है। राज्य उच्च शिक्षा परिषद ने पूरे प्रदेश को 11 मंडलों में बांटकर निरीक्षण समितियां बनाई हैं। इन समितियों की अध्यक्षता संबंधित मंडलायुक्त करेंगे। इन विशेष समितियों में जिलाधिकारी द्वारा नामित अधिकारी  राज्य विश्वविद्यालयों के वित्त अधिकारी  क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी और संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलपति शामिल रहेंगे। इनका मुख्य कार्य विश्वविद्यालयों का स्थलीय निरीक्षण करना दस्तावेजों की जांच करना और विस्तृत रिपोर्ट तैयार करना होगा। जांच के दौरान कुल 17 प्रमुख बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इनमें यूनिवर्सिटी को मिली अनुमति  भूमि और भवन की स्थिति  आधारभूत संरचना शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया  वेतनमान  यूजीसी मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम  प्रवेश प्रक्रिया शिकायत निवारण प्रणाली और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा यूनिवर्सिटी की रैंकिंग प्रशासनिक व्यवस्था  छात्र शिक्षक सहभागिता और शोध परियोजनाओं की भी समीक्षा की जाएगी। सरकार ने साफ किया है कि यह सिर्फ औपचारिक निरीक्षण नहीं होगा। यदि किसी यूनिवर्सिटी में नियमों का उल्लंघन या सुविधाओं की कमी पाई जाती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य निजी विश्वविद्यालयों में शिक्षा के उच्च मानकों को सुनिश्चित करना और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है।