UP चुनाव से पहले INDIA गठबंधन में घमासान, सीटों पर SP-कांग्रेस आमने-सामने
UP NEWS: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान की
खबरें सामने आ रही हैं। दोनों दलों के नेताओं के बयानों ने INDIA गठबंधन की एकजुटता को लेकर चर्चा तेज कर दी है। कांग्रेस की
ओर से अधिक सीटों की मांग और समाजवादी पार्टी की चुनावी तैयारियों के बीच राजनीतिक
बयानबाजी भी बढ़ी है। हालांकि, अखिलेश यादव ने
गठबंधन जारी रहने की बात कही है। ऐसे में सवाल है कि यह विवाद गठबंधन में दरार का
संकेत है या सीटों के बंटवारे से पहले दबाव बनाने की रणनीति? सीटों के बंटवारे पर SP-कांग्रेस के बीच मतभेद उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर चुनावी तैयारी के बीच
दोनों दलों की संभावित सीटों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। दिए गए विवरण के
मुताबिक, कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल
गौतम ने 150 सीटों से कम पर चुनाव नहीं लड़ने की बात
कही है। कांग्रेस का तर्क है कि पिछले चुनावों के आंकड़ों के आधार पर उसने ऐसी
सीटें चिह्नित की हैं, जहां पार्टी अपनी स्थिति मजबूत मानती है। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने 350 सीटों पर तैयारी की बात कही है। उन्होंने उम्मीदवार की
जीतने की क्षमता को सीट बंटवारे का अहम आधार बताया है। मीडिया रिपोर्टों और
राजनीतिक सूत्रों के हवाले से कांग्रेस की 105 से 115 सीटों की मांग और SP की ओर से 85 से 90 सीटें देने की संभावित पेशकश की चर्चा है। हालांकि, दोनों दलों के बीच अंतिम सीट बंटवारे का आधिकारिक फॉर्मूला
सामने नहीं आया है। नेताओं की बयानबाजी से बढ़ी सियासी गर्मी सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी भी तेज हुई
है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के कथित बयान—“न करें गठबंधन, कौन कह रहा है? हम क्या किसी से भीख मांग रहे हैं?”—के बाद समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि
उत्तर प्रदेश में भाजपा को चुनौती देने में अखिलेश यादव की अहम भूमिका है। वहीं, SP नेता आईपी सिंह ने कांग्रेस की 150 सीटों की मांग पर तंज कसते हुए तीखी टिप्पणी की। इन बयानों
ने दोनों दलों के बीच मतभेदों को सार्वजनिक चर्चा का विषय बना दिया है। अखिलेश यादव की बैठक से दूरी ने बढ़ाई अटकलें 30 सितंबर को दिल्ली में हुई INDIA गठबंधन की बैठक
में अखिलेश यादव शामिल नहीं हुए। समाजवादी पार्टी की ओर से इसके लिए पहले से तय
राजनीतिक व्यस्तताओं का हवाला दिया गया और प्रतिनिधि भेजा गया। बैठक का मुख्य
एजेंडा SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर
विपक्ष की साझा रणनीति बनाना था। हालांकि, राजनीतिक चर्चाओं में अखिलेश यादव की
गैरमौजूदगी को कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे पर चल रही खींचतान से भी जोड़कर देखा
गया। कुछ मीडिया रिपोर्टों में इसे कांग्रेस के साथ तत्काल बातचीत से बचने के
संकेत के रूप में पेश किया गया है, लेकिन इसे अखिलेश यादव की घोषित वजह नहीं माना जा सकता। कांग्रेस के गढ़ में SP की सक्रियता और सीटों पर दावेदारी उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे को लेकर रायबरेली, अमेठी और आसपास की कुछ विधानसभा सीटों पर भी चर्चा की खबरें
हैं। राजनीतिक विश्लेषणों में ऊंचाहार, हरचंदपुर और अमेठी जैसी सीटों को संभावित बातचीत के केंद्र के रूप में बताया
जा रहा है। हालांकि, इन सीटों को लेकर दोनों दलों के बीच किसी
आधिकारिक विवाद या अंतिम दावेदारी की पुष्टि नहीं हुई है। अखिलेश यादव की ओर से उम्मीदवारों की जीतने की क्षमता पर जोर दिया गया है, जबकि कांग्रेस अपनी सांगठनिक मौजूदगी और चुनावी तैयारी के
आधार पर अधिक सीटों की मांग कर रही है। कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने सीट
बंटवारे पर अक्टूबर में बातचीत पूरी होने की उम्मीद जताई है। AIMIM और मुस्लिम मतदाताओं का समीकरण इस राजनीतिक घटनाक्रम में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM की संभावित भूमिका को लेकर भी चर्चा है। उपलब्ध खबरों में
ओवैसी की ओर से विपक्षी दलों के साथ एकजुटता की अपील और निर्धारित समय तक इंतजार
करने की बात कही गई है। वहीं, समाजवादी पार्टी
की ओर से AIMIM को INDIA गठबंधन में शामिल करने के समर्थन का कोई स्पष्ट संकेत उपलब्ध विवरण में नहीं
है। उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन SP-कांग्रेस के चुनावी समीकरण में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पहलू माना जाता है।
हालांकि, किसी एक दल को इस मतदाता वर्ग का निश्चित
समर्थन प्राप्त होने का दावा करना उचित नहीं होगा। मतदाताओं का रुझान क्षेत्र, उम्मीदवार और स्थानीय मुद्दों के आधार पर अलग-अलग हो सकता
है। BJP और अन्य दलों की प्रतिक्रिया भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस और SP के बीच सीटों की बातचीत को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस
अधिक सीटें हासिल करने के लिए अखिलेश यादव पर दबाव बना रही है। वहीं, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) अध्यक्ष ओम प्रकाश
राजभर ने SP-कांग्रेस के रिश्तों पर तंज कसते हुए 1995 के गेस्ट हाउस कांड का उल्लेख किया और कहा कि राजनीति में
कोई भी गठबंधन स्थायी नहीं होता। ये टिप्पणियां संबंधित नेताओं के राजनीतिक बयान हैं। इन्हें गठबंधन के भविष्य
के बारे में प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। 2024 के लोकसभा चुनाव में साथ आए थे SP-कांग्रेस 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 सीटों पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था। SP ने 63 और कांग्रेस ने 17 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। चुनाव परिणाम में SP को 37 और कांग्रेस को 6 सीटें मिलीं। इस तरह दोनों दलों ने मिलकर 43 सीटें जीती थीं। हालांकि, विधानसभा चुनाव का राजनीतिक और सामाजिक
समीकरण लोकसभा चुनाव से अलग हो सकता है। 2017 में SP-कांग्रेस ने गठबंधन किया था, लेकिन उस चुनाव में भाजपा को बड़ी जीत मिली थी। 2022 में दोनों दल अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरे थे। इसलिए 2024 के परिणामों को 2027 के विधानसभा चुनाव का सीधा संकेत मानना उचित नहीं होगा। क्या सीटों की खींचतान से टूट सकता है गठबंधन? राजनीतिक रिपोर्टों में मौजूदा विवाद को सीट बंटवारे से पहले दबाव बनाने की
प्रक्रिया के तौर पर भी देखा जा रहा है। कांग्रेस जल्दी सीटों पर सहमति चाहती है, जबकि SP अपनी चुनावी
तैयारी और उम्मीदवारों की जीतने की क्षमता को आधार बनाने पर जोर दे रही है। दूसरी ओर, अखिलेश यादव ने गठबंधन जारी रखने की बात
कही है। 30 सितंबर को प्रकाशित रिपोर्टों में भी
उनके INDIA गठबंधन के प्रति सकारात्मक रुख और
विपक्षी एकता पर दिए गए बयानों का उल्लेख है। फिलहाल, SP और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे का कोई
अंतिम समझौता सार्वजनिक नहीं हुआ है। अक्टूबर में प्रस्तावित बातचीत, दोनों दलों की सीटों की मांग और उम्मीदवारों के चयन की
प्रक्रिया से गठबंधन की आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है। इसलिए मौजूदा बयानबाजी को
गठबंधन टूटने का निर्णायक संकेत मानने के बजाय इसे जारी राजनीतिक बातचीत और
मतभेदों के संदर्भ में देखना अधिक उपयुक्त होगा।















