नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र में NEET UG 2026 और पेपर लीक के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। राज्यसभा में 'पब्लिक एग्जामिनेशन अमेंडमेंट बिल 2026' पर चर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर छात्रों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया। उन्होंने NEET 2026, NTA की कार्यप्रणाली और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से कई सवाल पूछे।

छात्रों पर कार्रवाई को लेकर सरकार से सवाल

राज्यसभा में बोलते हुए खरगे ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलनों के दौरान लाठीचार्ज, आंसू गैस और पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया, जिसमें कई छात्र घायल हुए। उन्होंने सरकार से पूछा—

सादे कपड़ों में छात्रों की पिटाई करने वाले लोग कौन थे?
RAF और CRPF को बल प्रयोग का आदेश किसने दिया?
इस पूरी कार्रवाई का जिम्मेदार कौन है?

NTA सुधारों की उठाई मांग

खरगे ने कहा कि केवल सजा और जुर्माना बढ़ाने से पेपर लीक की समस्या खत्म नहीं होगी। उन्होंने कहा कि जब तक नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में व्यापक संस्थागत सुधार नहीं किए जाएंगे, तब तक परीक्षाओं में गड़बड़ियां जारी रहेंगी।

'10 वर्षों में 152 पेपर लीक' का दावा

खरगे ने सदन में दावा किया कि वर्ष 2015 से 2026 के बीच देशभर में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के 152 पेपर लीक हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े आरोपियों के खिलाफ अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। साथ ही NEET 2024 और NEET 2026 मामलों का भी उल्लेख किया।

22 लाख छात्रों के भविष्य पर चिंता

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि NEET UG 2026 में 22 लाख से अधिक अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र बाजार में उपलब्ध होने की बातें सामने आईं और पूछा कि यदि ऐसा था तो संबंधित एजेंसियां क्या कर रही थीं।

संसद में रखीं प्रमुख मांगें

खरगे ने सरकार के सामने कई मांगें रखीं—

UPSC की तर्ज पर सभी राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए वार्षिक परीक्षा कैलेंडर लागू किया जाए।
छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की पूरी जानकारी संसद के सामने रखी जाए।
NTA में व्यापक प्रशासनिक और संस्थागत सुधार किए जाएं।
पेपर लीक मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

'2024 में भी की थी कड़े कानून की मांग'

खरगे ने कहा कि कांग्रेस ने वर्ष 2024 में ही पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून की मांग की थी। उनका आरोप है कि सरकार ने समय पर कदम नहीं उठाए, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ।