हजारीबाग: हजारीबाग की बेटी और प्रसिद्ध समाजसेवी स्वर्गीय जादो बाबू की पोती प्रीति कुमार ने तसर उद्योग में स्वदेशी नवाचार के जरिए पूरे झारखंड का गौरव बढ़ाया है। नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन (AIM) द्वारा आयोजित ग्रासरूट्स इनोवेटर रिकग्निशन-2026 के लिए चयनित प्रीति कुमार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित किया गया। ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं को तसर उद्योग के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया।
देशभर के 26 नवप्रवर्तकों में मिली जगह
लुगम कोकून प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी (CEO) प्रीति कुमार देशभर से चयनित 26 जमीनी नवप्रवर्तकों में शामिल रहीं। खास बात यह है कि झारखंड से इस सम्मान के लिए चयनित होने वाली वह एकमात्र नवप्रवर्तक हैं।
तसर उद्योग में स्वदेशी तकनीक से किया नवाचार
प्रीति कुमार ने तसर वस्त्र उद्योग में आयातित धागों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित उच्च गुणवत्ता वाला तसर धागा विकसित किया। उनके इस नवाचार से स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिला है और ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार एवं सम्मानजनक आजीविका के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।
99 प्रतिशत महिलाएं कर रही हैं काम
वर्तमान में उनकी कंपनी रामगढ़ के सिकनी और हजारीबाग जिले के चरही प्रखंड के कजरी गांव में तसर धागा एवं वस्त्र निर्माण का कार्य कर रही है। यहां कार्यरत कर्मचारियों में लगभग 99 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो इस पहल के जरिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।
शिक्षा और जनजातीय विकास में भी रहा योगदान
प्रीति कुमार इससे पहले झारखंड शिक्षा विभाग में परियोजना पदाधिकारी के रूप में कार्य कर चुकी हैं। उन्होंने बालिका शिक्षा, जनजातीय विकास तथा विशेष रूप से बिरहोर समुदाय के बीच लंबे समय तक काम किया। सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को आज भी सराहा जाता है।
जादो बाबू की विरासत को मिला नया आयाम
प्रीति कुमार हजारीबाग के प्रसिद्ध समाजसेवी स्वर्गीय जादो बाबू की पोती हैं। शहर का प्रमुख जादो बाबू चौक उनके सम्मान में ही नामित है। वहीं उनके पिता स्वर्गीय भगवान सहाय भी सामाजिक कार्यों के लिए जाने जाते थे। प्रीति ने अपने परिवार की सेवा परंपरा को नवाचार और सामाजिक उद्यमिता से जोड़कर नई पहचान दिलाई है।
उनकी यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि हजारीबाग, झारखंड और महिला सशक्तीकरण की प्रेरणादायी मिसाल बन गई है।














