गुमला: गुमला जिले के डुमरी प्रखंड स्थित राजकीयकृत उत्क्रमित मध्य विद्यालय, नटावल की हालत इन दिनों बेहद चिंताजनक बनी हुई है। विद्यालय भवन की जर्जर छत और बारिश के दौरान लगातार हो रहे पानी के रिसाव के कारण छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। हालात ऐसे हैं कि बच्चों को प्लास्टिक और तिरपाल के सहारे कक्षाओं में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।
बारिश में टपकती छत, भीग रही किताबें और डेस्क-बेंच
विद्यालय की छत कई स्थानों से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। बारिश शुरू होते ही पानी सीधे कक्षाओं में टपकने लगता है। इससे बच्चों की किताबें, कॉपियां और डेस्क-बेंच भी भीगने का खतरा बना रहता है। कई बार पानी अधिक गिरने पर शिक्षक और छात्र डेस्क-बेंच को इधर-उधर खिसकाकर किसी तरह पढ़ाई जारी रखते हैं।
तिरपाल लगाकर बचाई जा रही व्यवस्था
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका स्मृति तिर्की ने बताया कि पिछले वर्ष भवन की मरम्मत कराई गई थी, लेकिन इसके बावजूद छत से पानी टपकने की समस्या खत्म नहीं हुई। बच्चों की परेशानी को देखते हुए उन्होंने अपने निजी खर्च से छत पर तिरपाल लगवाया, ताकि बारिश का पानी कम से कम कक्षा के भीतर पहुंचे।
उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान बच्चों को इस तरह कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई करते देख उन्हें भी दुख होता है। बाहर से विद्यालय भवन ठीक दिखाई देता है, लेकिन अंदर की स्थिति बेहद खराब है।
छात्रा ने सुनाई परेशानी
विद्यालय की छात्रा नंदनी कुमारी ने बताया कि बारिश के समय छत से लगातार पानी टपकता है। ऐसे में उन्हें अपनी सीट बदलनी पड़ती है और कई बार पढ़ाई बाधित हो जाती है।
ग्रामीणों ने जताई चिंता
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जर्जर भवन में बच्चों की पढ़ाई कराना उनकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। उनका कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत नहीं कराई गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से विद्यालय भवन की तत्काल जांच कराकर स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है।
स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों और अभिभावकों ने मांग की है कि विद्यालय भवन की जर्जर छत की जल्द मरम्मत कराई जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा मिल सके और उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।














