हजारीबाग–बगोदर फोरलेन परियोजना को बड़ा झटका, भूमि अधिग्रहण और वन मंजूरी में देरी से टेंडर वापस
हजारीबाग: हजारीबाग और गिरिडीह को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित हजारीबाग–बगोदर फोरलेन परियोजना को बड़ा झटका लगा है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने भूमि अधिग्रहण और वन भूमि स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण परियोजना की मौजूदा टेंडर प्रक्रिया वापस ले ली है। इस फैसले से वर्षों से बेहतर सड़क और तेज यातायात की उम्मीद लगाए बैठे लाखों लोगों को निराशा हाथ लगी है। यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग-100 (NH-100) के चौड़ीकरण से जुड़ी है, जिसे हजारीबाग, गिरिडीह और जीटी रोड (NH-19) के बीच बेहतर संपर्क का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन, मालवाहक ट्रक और यात्री बसें गुजरती हैं। फोरलेन बनने के बाद यात्रा का समय कम होने और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद थी। सूत्रों के अनुसार, परियोजना के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी और बजट पहले ही मिल चुका था, लेकिन जमीनी स्तर पर भूमि अधिग्रहण और वन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (Forest Clearance) की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी। कई स्थानों पर प्रभावित रैयतों को मुआवजा वितरण लंबित है, जबकि कुछ भूमि विवाद न्यायालयों में लंबित होने के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को निर्माण के लिए विवादमुक्त जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी। इसके अलावा वन क्षेत्र से गुजरने वाले हिस्सों के लिए आवश्यक मंजूरियां भी निर्धारित समय पर नहीं मिल सकीं। हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, NHAI, झारखंड सरकार के पथ निर्माण विभाग तथा हजारीबाग और गिरिडीह प्रशासन के अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में परियोजना की प्रगति की समीक्षा के दौरान मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अधूरी तैयारियों के बीच निर्माण कार्य शुरू करना संभव नहीं है। बैठक में यह भी दोहराया गया कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की नीति के अनुसार, किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में तब तक निर्माण एजेंसी को कार्य आवंटित नहीं किया जाता, जब तक परियोजना के लिए आवश्यक अधिकांश भूमि का अधिग्रहण पूरा न हो जाए। टेंडर प्रक्रिया वापस होने के बाद अब हजारीबाग-बगोदर मार्ग के फोरलेन निर्माण में और देरी की आशंका बढ़ गई है। इससे इस सड़क पर रोजाना सफर करने वाले यात्रियों, व्यापारियों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों को फिलहाल खराब सड़क और जाम की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद टूटती नजर आ रही है। केंद्रीय मंत्रालय ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन को पहले भूमि अधिग्रहण, मुआवजा वितरण और वन स्वीकृति से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार, जब पूरी परियोजना के लिए विवादमुक्त भूमि उपलब्ध करा दी जाएगी और सभी तकनीकी बाधाएं दूर हो जाएंगी, तब इस परियोजना के लिए दोबारा टेंडर जारी करने पर विचार किया जाएगा। फिलहाल यह महत्वाकांक्षी फोरलेन परियोजना प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनों के कारण अनिश्चितकाल के लिए टलती हुई दिखाई दे रही है।भूमि अधिग्रहण और वन मंजूरी बनी सबसे बड़ी बाधा
दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक
फिलहाल नहीं मिलेगी खराब सड़क से राहत
अब आगे क्या?














