गिरिडीह: प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ सड़क और पुल निर्माण के दावों पर गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड से बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। पिपराटांड़ गांव स्थित लोकल नदी पर करोड़ों रुपये की लागत से बने उच्चस्तरीय आरसीसी पुल की एप्रोच सड़क पहली ही बारिश में बह गई। सड़क का बड़ा हिस्सा कट जाने से पुल के समीप करीब चार फीट गहरा गड्ढा बन गया है, जिससे राहगीरों की जान पर खतरा मंडरा रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार पुल और सड़क का निर्माण करीब डेढ़ वर्ष पहले हुआ था। निर्माण के समय ही ग्रामीणों ने गुणवत्ता को लेकर कई बार आपत्ति जताई थी, लेकिन संबंधित विभाग और अधिकारियों ने शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया। अब पहली ही बारिश में सड़क ध्वस्त होने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

निर्माण में अनियमितता का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि पुल की एप्रोच सड़क का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं किया गया। गार्डवाल से काफी नीचे सड़क की ढलाई कर केवल औपचारिकता निभाई गई, जिसके कारण बारिश का पानी आते ही पूरी सड़क कटकर बह गई।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पुल की सुरक्षा के लिए बनाया जा रहा गार्डवाल भी अधूरा छोड़ दिया गया था। तेज बारिश के दौरान पानी का दबाव बढ़ने पर गार्डवाल टूट गया और उसका मलबा आसपास के खेतों में जा गिरा। आरोप है कि बाद में निर्माण एजेंसी ने जेसीबी से मलबा हटाकर मामले को दबाने की कोशिश की और काम अधूरा छोड़कर चली गई।

2029 तक है गारंटी

पुल स्थल पर लगे शिलापट्ट के अनुसार, खिजूरी-बरास्ता बस्तीकुरहा मार्ग के चेनज 9.900 किलोमीटर पर स्थित इस पुल का निर्माण उमेश एंड माणिक कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, देवघर द्वारा कराया गया है। बोर्ड में कार्य पूर्ण होने की तिथि 12 दिसंबर 2024 तथा गारंटी अवधि 12 दिसंबर 2029 तक अंकित है।

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब निर्माण कार्य अभी डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड (गारंटी अवधि) में है, तो पहली ही बारिश में सड़क कैसे बह गई?

अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण के दौरान कई बार शिकायत की गई, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने निरीक्षण या कार्रवाई करना जरूरी नहीं समझा। ग्रामीणों के मुताबिक, गार्डवाल धंसने के बाद कुछ बार मरम्मत का प्रयास जरूर हुआ, लेकिन भुगतान विवाद के कारण मजदूर काम छोड़कर लौट गए और आज तक निर्माण पूरा नहीं हो सका।

जांच और कार्रवाई की मांग

झामुमो तिसरी प्रखंड अध्यक्ष रिंकू बरनवाल ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित निर्माण एजेंसी द्वारा तिसरी प्रखंड में किए गए अन्य कार्यों की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है।

उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से निर्माण एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने, तकनीकी जांच कराने तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

अब लोगों की नजर जिला प्रशासन और ग्रामीण विकास विभाग पर टिकी है कि करोड़ों रुपये की इस परियोजना में सामने आई खामियों पर जिम्मेदारी तय होती है या मामला सिर्फ जांच तक सीमित रह जाता है।