घाघरा गुमला: सरकारी योजनाओं में वित्तीय अनियमितता के आरोपों ने घाघरा प्रखंड की चुंदरी पंचायत में सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में 15वें वित्त आयोग के मुखिया फंड से स्वीकृत वर्मी कंपोस्ट निर्माण योजना में बिना धरातल पर काम कराए ही भुगतान कर दिया गया। ग्रामीणों के मुताबिक, योजना के तहत 32 यूनिट वर्मी कंपोस्ट निर्माण के लिए कुल 4.40 लाख रुपये की योजना स्वीकृत की गई थी, जबकि इसके एवज में करीब 75 हजार रुपये का भुगतान किया गया।ग्रामीणों का कहना है कि योजना का कोड 54423181 सरकारी अभिलेखों में दर्ज है, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी मौके पर वर्मी कंपोस्ट यूनिट का कोई स्पष्ट अस्तित्व दिखाई नहीं देता। इसे लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है और उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

कागजों पर योजना, जमीन पर नहीं दिखा काम

ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड में योजना को आगे बढ़ाया गया, लेकिन वास्तविकता में निर्माण कार्य नहीं हुआ। उनका सवाल है कि यदि मौके पर काम नहीं हुआ, तो फिर भुगतान किस आधार पर किया गया।ग्रामीणों ने योजना से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि योजना की प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति कब हुई, कार्यादेश किसे दिया गया और कार्य का भौतिक सत्यापन किस अधिकारी या कर्मचारी ने किया।

MB और लाभुकों की सूची सार्वजनिक करने की मांग

ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए मापी पुस्तिका (MB), कार्यादेश, प्रशासनिक स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति और लाभुकों की सूची सार्वजनिक करने की मांग की है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य वास्तव में हुआ था, तो संबंधित स्थानों का स्थलीय सत्यापन कराया जाना चाहिए। वहीं, यदि बिना काम के भुगतान किया गया है, तो भुगतान की प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों और कर्मियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

बैंक ट्रेल की जांच की उठी मांग

ग्रामीणों ने करीब 75 हजार रुपये के भुगतान की बैंक ट्रेल की जांच कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि राशि किस खाते में भेजी गई और भुगतान के बाद रकम का इस्तेमाल किस प्रकार हुआ, इसकी जांच से पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।ग्रामीणों ने मांग की है कि भुगतान से जुड़े सभी वित्तीय दस्तावेज और संबंधित बैंक लेनदेन की जांच कराई जाए।

दो साल से काम नहीं होने पर उठे सवाल

मामला वित्तीय वर्ष 2023-24 का बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब दो साल बीत जाने के बाद भी यदि योजना धरातल पर दिखाई नहीं देती, तो यह प्रखंड स्तर पर निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मामले का संज्ञान लेकर स्वतंत्र टीम से स्थलीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच में यदि वित्तीय अनियमितता या सरकारी राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए और सरकारी राशि की वसूली कर राजकोष में वापस जमा कराई जाए।

उच्चस्तरीय जांच की मांग

चुंदरी पंचायत के ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि केवल कागजी रिकॉर्ड के आधार पर योजना को सही नहीं माना जाना चाहिए। मौके पर वास्तविक स्थिति की जांच के साथ भुगतान प्रक्रिया और संबंधित अभिलेखों की भी जांच जरूरी है।अब देखना होगा कि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों पर जिला प्रशासन क्या संज्ञान लेता है और जांच में योजना की वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।