हजारीबाग जिले के दारू प्रखंड में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। स्थिति यह है कि करोड़ों रुपये खर्च कर लगाए गए सोलर जलमीनार अब बेकार साबित हो रहे हैं और हजारों लोगों को पानी के लिए दर दर भटकना पड़ रहा है।केंद्र और राज्य सरकार की हर घर नल जल योजना के तहत प्रखंड के 9 पंचायतों के 53 गांवों में करीब 52 हजार लोगों के लिए 100 से अधिक सोलर जलमीनार लगाए गए थे। इन जलमीनारों के निर्माण पर लगभग 15 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन इनमें से 60 से अधिक जलमीनार पूरी तरह खराब पड़े हैं।अप्रैल माह से ही बढ़ती गर्मी के कारण कुएं और तालाब सूखने की कगार पर हैं जिससे हालात और बिगड़ गए हैं। कई गांवों में लोगों को एक बूंद पानी के लिए भी मशक्कत करनी पड़ रही है।मेढकुरी पंचायत में करीब 40 जलमीनार बनाए गए जिनमें कई अधूरे हैं कई में पानी नहीं निकलता और कई के पाइपलाइन घरों तक नहीं पहुंचे हैं। दिगवार पंचायत के गड़्या गांव में 25-30 घरों के लोग एक चापाकल और एक कुएं के सहारे हैं। ग्रामीणों को सुबह से पानी के लिए लाइन लगानी पड़ती है।स्थानीय निवासी इंद्र पासवान ने बताया कि हर घर नल जल योजना पूरी तरह धराशायी हो चुकी है। अब हम लोग केवल कुएं के पानी पर निर्भर हैं जो गर्मी के साथ सूखता जा रहा है।इरगा कबिलासी पुनाई हरली और दारू पंचायतों में भी कई जलमीनार वर्षों से खराब पड़े हैं। कई जगहों पर सोलर प्लेट मोटर और पाइपलाइन खराब हैं तो कहीं निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है।ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार विभाग और जनप्रतिनिधियों को सूचना देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है। लोगों का कहना है कि योजना के नाम पर केवल राशि खर्च कर दी गई लेकिन जमीनी स्तर पर कोई लाभ नहीं मिला।अब सवाल यह उठ रहा है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद जब लोगों को पानी नहीं मिल रहा है तो आखिर जिम्मेदार कौन है