नई दिल्ली: पंजाबी अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। करीब चार साल तक रिलीज का इंतजार, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के 127 कट्स, तीन बार नाम बदलने और अंततः OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने के महज 48 घंटे बाद फिल्म को हटा दिए जाने के बाद इस मामले ने नई बहस छेड़ दी है। फिल्म 1995 में लापता हुए बैंक कर्मचारी और मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित बताई जा रही है।
कौन थे जसवंत सिंह खालड़ा?
जसवंत सिंह खालड़ा पंजाब के एक बैंक कर्मचारी थे, जो शिरोमणि अकाली दल की मानवाधिकार इकाई से जुड़े थे। उन्होंने 1984 से 1994 के बीच कथित तौर पर लापता हुए लोगों और लावारिस शवों के अंतिम संस्कार से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड की जांच की थी।
1995 में उन्होंने दावा किया था कि हजारों अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार किया गया, जिनकी पहचान और मौत की परिस्थितियां संदिग्ध थीं। हालांकि पंजाब पुलिस ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था।
खुद भी हो गए लापता
6 सितंबर 1995 को अमृतसर स्थित अपने घर के बाहर से जसवंत सिंह खालड़ा कथित तौर पर कुछ लोगों द्वारा उठा लिए गए। इसके बाद वह कभी जीवित नहीं मिले। उनकी पत्नी परमजीत कौर ने लगातार न्याय की लड़ाई लड़ी और बाद में मामले की जांच CBI को सौंपी गई।
CBI जांच में क्या सामने आया?
CBI की जांच में कुछ पुलिस अधिकारियों की भूमिका सामने आई। जांच एजेंसी ने अपहरण, अवैध हिरासत और हत्या की साजिश से जुड़े आरोपों की जांच की। बाद की न्यायिक प्रक्रिया में कई पुलिस अधिकारियों को दोषी ठहराया गया। हालांकि खालड़ा का शव कभी बरामद नहीं हुआ।
फिल्म का सफर भी विवादों से भरा
निर्देशक हनी त्रेहान की इस फिल्म का पहला नाम 'घल्लूघारा' रखा गया था। बाद में इसका नाम 'पंजाब 95' किया गया और आखिर में 'सतलुज' के नाम से रिलीज किया गया।
बताया गया कि CBFC ने फिल्म में 127 कट्स लगाने, मुख्य किरदार का नाम बदलने, पंजाब पुलिस से जुड़े कई संदर्भ हटाने और कुछ धार्मिक व राष्ट्रीय प्रतीकों वाले दृश्यों में बदलाव करने का सुझाव दिया था। इन्हीं कारणों से फिल्म की रिलीज लंबे समय तक टलती रही।
48 घंटे बाद OTT से क्यों हटाई गई फिल्म?
करीब चार साल की देरी के बाद 3 जुलाई 2026 को फिल्म OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज हुई। लेकिन रिलीज के लगभग 48 घंटे बाद इसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया।
ZEE5 ने अपने बयान में कहा कि "मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए फिल्म को अगली सूचना तक भारत में उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। कानूनी प्रक्रिया के तहत इसे दोबारा उपलब्ध कराने के प्रयास जारी हैं।"
हालांकि प्लेटफॉर्म ने यह स्पष्ट नहीं किया कि फिल्म हटाने का निर्णय किसके निर्देश पर लिया गया या इसके पीछे कौन-सी कानूनी प्रक्रिया रही। इसी वजह से फिल्म को हटाए जाने को लेकर अब भी कई सवाल बने हुए हैं।
बहस फिर तेज
फिल्म को लेकर सेंसरशिप, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित फिल्मों की प्रस्तुति को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अब नजर इस बात पर है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद क्या 'सतलुज' दोबारा OTT पर लौटेगी या नहीं।















