भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच हुआ कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) बुधवार, 15 जुलाई 2026 से लागू हो गया। इस मुक्त व्यापार समझौते को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और ब्रिटेन के संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया। सरकार का मानना है कि इस समझौते से व्यापार, निवेश, सेवाओं और आर्थिक सहयोग को नई गति मिलेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि CETA दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि इससे किसानों, उद्यमियों, एमएसएमई, स्टार्टअप और भारतीय पेशेवरों के लिए नए अवसर खुलेंगे। साथ ही भारतीय उत्पादों और सेवाओं की ब्रिटिश बाजार तक पहुंच और अधिक आसान होगी।

पीएम मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि नवाचार, तकनीक, निवेश और कुशल मानव संसाधन के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा कि सोशल सिक्योरिटी समझौते के तहत ब्रिटेन में अस्थायी रूप से काम करने वाले पात्र भारतीय पेशेवरों और भारतीय कंपनियों को भी महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा।

भारत को क्या-क्या होंगे फायदे?

CETA लागू होने के बाद भारत के कई प्रमुख निर्यात क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट
जेम्स एंड ज्वेलरी
इंजीनियरिंग उत्पाद
फार्मास्यूटिकल्स
ऑटो कंपोनेंट्स
कृषि उत्पाद
समुद्री उत्पाद

इन क्षेत्रों के उत्पादों पर ब्रिटेन में आयात शुल्क कम या समाप्त होने से भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और नए बाजार खुलेंगे।

MSME और किसानों को मिलेगा लाभ

सरकार के अनुसार इस समझौते से छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को ब्रिटेन के बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। वहीं कृषि और खाद्य उत्पादों के निर्यात में भी वृद्धि की संभावना है, जिससे किसानों को नए अवसर प्राप्त होंगे।

पेशेवरों और निवेश को भी मिलेगा बढ़ावा

समझौते में डिजिटल व्यापार, निवेश, बौद्धिक संपदा, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाने और पेशेवरों की आवाजाही से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं। सोशल सिक्योरिटी समझौते के कारण पात्र भारतीय पेशेवरों को दोहरी सामाजिक सुरक्षा अंशदान से राहत मिल सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-यूके CETA से विदेशी निवेश आकर्षित होगा, वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भागीदारी मजबूत होगी और आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।