ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) से वैश्विक तेल और गैस सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। हालांकि, इस बार भारत पहले की तुलना में कहीं बेहतर स्थिति में है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई बाधित भी होती है, तो भारत के पास पर्याप्त बैकअप और वैकल्पिक व्यवस्था मौजूद है।

अगस्त तक की सप्लाई पहले से तय

इंडस्ट्री विशेषज्ञों के अनुसार, अगस्त तक कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई के अधिकांश आयात अनुबंध पहले ही तय किए जा चुके हैं। इसके अलावा एलपीजी (LPG) आयात की भी अग्रिम व्यवस्था कर ली गई है। हालांकि एलएनजी (LNG) की सप्लाई पर कुछ असर पड़ सकता है, लेकिन उससे निपटने की तैयारी भी की गई है।

भारत ने बढ़ाए तेल और गैस के स्रोत

ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत ने अपने आयात स्रोतों में बड़ा विस्तार किया है।

पहले भारत 27 देशों से तेल और गैस आयात करता था।
अब यह संख्या बढ़कर 41 देशों तक पहुंच गई है।
वर्तमान में रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता है।
इसके अलावा अमेरिका और पश्चिम अफ्रीकी देशों से भी बड़े पैमाने पर क्रूड ऑयल आयात किया जा रहा है।
हॉर्मुज पर निर्भरता भी घटी

भारत ने आपातकालीन रणनीति के तहत हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी निर्भरता कम की है।

पहले लगभग 45% तेल और गैस इसी मार्ग से आता था।
अब इसे घटाकर करीब 30% तक सीमित कर दिया गया है।

इससे किसी संभावित संकट की स्थिति में भारत पर असर अपेक्षाकृत कम पड़ने की संभावना है।

भारत के पास कितना बैकअप?

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, देश ने पर्याप्त रणनीतिक भंडार तैयार कर रखा है।

60 दिनों का कच्चे तेल (Crude Oil) का स्टॉक
60 दिनों का LNG इन्वेंट्री बैकअप
45 दिनों का एडवांस LPG स्टॉक

सरकार का कहना है कि इन भंडारों से आपातकालीन स्थिति में घरेलू मांग पूरी की जा सकती है।

रिफाइनरियां भी हुईं आधुनिक

भारत ने अपनी रिफाइनरियों को भी अपग्रेड किया है। अब देश की अधिकांश रिफाइनरियां दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले विभिन्न ग्रेड के कच्चे तेल को प्रोसेस करने में सक्षम हैं। इससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता और कम हुई है।

विशेषज्ञों की राय

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि में भारत को ऊर्जा स्रोतों में और विविधता लानी होगी। इलेक्ट्रिक वाहनों, बायोफ्यूल और स्वच्छ ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से भविष्य में आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम की जा सकती है। हालांकि, यह बदलाव धीरे-धीरे ही संभव होगा।