जलस्तर घटने के बाद बढ़ा जलजनित बीमारियों का खतरा, कटिहार में डॉक्टरों और दवाइयों के साथ नाव से पहुंच रही स्वास्थ्य सेवा
पटना: बिहार में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने के साथ ही अब प्रभावित इलाकों में जलजनित बीमारियों और संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। दूषित पानी, जलमग्न चापाकलों और जगह-जगह जमा गंदगी के कारण बाढ़ प्रभावित लोगों में बुखार, टायफाइड, उल्टी-दस्त, त्वचा रोग और फंगल इंफेक्शन जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए प्रशासन ने ‘बोट एंबुलेंस’ सेवा शुरू की है। कटिहार में सोमवार से शुरू हुई यह सेवा डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और जरूरी दवाइयों के साथ नाव के जरिए प्रभावित परिवारों तक पहुंच रही है। जरूरत पड़ने पर मेडिकल टीम लोगों के घरों और छतों तक जाकर इलाज कर रही है। गंगा, पुनपुन, कोसी और गंडक समेत कई नदियों का जलस्तर कम होने से लोगों को बाढ़ से थोड़ी राहत मिली है। लेकिन पानी घटने के बाद कई इलाकों में कीचड़, गंदा पानी और कचरा जमा है। कई स्थानों पर चापाकल अभी भी पानी में डूबे हुए हैं। इससे स्वच्छ पेयजल की समस्या बनी हुई है। दूषित पानी के इस्तेमाल से लोगों में पेट संबंधी बीमारियों और संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। जानकारी के अनुसार, इस साल बिहार के 15 जिलों के 88 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हुई हैं। इनमें पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अरवल शामिल हैं। जहां से बाढ़ का पानी निकल चुका है, वहां भी जलजमाव और गंदगी के कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बनी हुई हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और राहत शिविरों में इन स्वास्थ्य समस्याओं के मामले सामने आ रहे हैं— वैशाली जिले के छह प्रखंडों में संचालित चिकित्सा शिविरों में 12 सितंबर तक एक्यूट डायरिया के 75, बुखार के 5,467, सर्दी-खांसी के 5,140 और चर्म रोग के 10,775 मरीजों का उपचार किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, सासाराम सदर अस्पताल में सितंबर के पहले 14 दिनों में 640 मरीजों में टायफाइड की पुष्टि होने की बात सामने आई है। भोजपुर के पांच प्रखंडों की 34 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित रही हैं, जहां स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों का इलाज किया गया। बेगूसराय के दियारा क्षेत्र के कई गांवों में लंबे समय से चापाकल बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं। कई जगहों पर चापाकलों से साफ पानी नहीं मिलने की शिकायत है। इससे गरीब परिवारों के सामने सुरक्षित पेयजल का संकट बना हुआ है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीमों को तैनात किया गया है और राहत शिविरों में इलाज के साथ दवाइयां भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में सड़क संपर्क बाधित होने और कई गांवों तक सामान्य एंबुलेंस नहीं पहुंच पाने की स्थिति को देखते हुए बोट एंबुलेंस को महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। कटिहार में शुरू की गई इस सेवा के जरिए स्वास्थ्यकर्मी नाव से उन इलाकों तक पहुंचेंगे, जहां मरीजों को अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। प्रशासन की कोशिश है कि बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सके और प्रभावित लोगों को उनके घर के करीब चिकित्सा सुविधा मिल सके।पानी घटा तो बढ़ी स्वास्थ्य संबंधी चुनौती
88 प्रखंडों की 575 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित
इन बीमारियों के मरीज बढ़े
राहत शिविरों में बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज
बेगूसराय में दूषित पानी बनी बड़ी समस्या
घरों तक पहुंचेगी स्वास्थ्य सेवा















