नई दिल्ली: मध्य एशिया में जारी संघर्ष के बीच हॉर्मुज स्ट्रेट में व्यापारी जहाज पर हुए हमले के बाद लापता भारतीय मर्चेंट नेवी कप्तान आशीष कुमार के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। कप्तान की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका दायर कर केंद्र सरकार से अपने पति का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।

याचिका में विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे सभी उपलब्ध राजनयिक, कांसुलर और खुफिया माध्यमों का उपयोग कर कप्तान आशीष कुमार का पता लगाएं और मामले में परिवार को नियमित जानकारी उपलब्ध कराएं।

क्या है पूरा मामला?

मार्च 2026 में हॉर्मुज स्ट्रेट में एक व्यापारी जहाज पर मिसाइल हमला हुआ था। शुरुआती जांच में कप्तान आशीष कुमार के केबिन से मिले जले हुए अवशेषों के आधार पर उन्हें मृत मान लिया गया था। हालांकि बाद में डीएनए जांच में उन अवशेषों का मिलान आशीष कुमार से नहीं हुआ।

इसके बाद 15 मई 2026 को मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने परिवार को सूचित किया कि बरामद अवशेष कप्तान आशीष कुमार के नहीं हैं। इसके बाद से परिवार का मानना है कि वह अभी भी लापता हैं और उनके जीवित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

याचिका में क्या कहा गया है?

कप्तान की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में दावा किया है कि उनके पति संभवतः किसी विदेशी तत्व की अवैध हिरासत में हैं। उन्होंने अदालत से आग्रह किया है कि केंद्र सरकार को प्रभावी कूटनीतिक प्रयास कर उन्हें खोजने और सुरक्षित वापस लाने का निर्देश दिया जाए।

याचिका में यह भी कहा गया है कि घटना वाले दिन कप्तान के दूसरे मोबाइल फोन पर भेजा गया व्हाट्सऐप संदेश डिलीवर हुआ था, जिससे उनके जीवित होने की संभावना को बल मिलता है।

साथ ही ओमान की शाही पुलिस की जैविक जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि बरामद अस्थि अवशेषों में किसी मानव डीएनए की पुष्टि नहीं हुई, जिससे पहले की मृत्यु संबंधी धारणा गलत साबित होती है।

संवैधानिक अधिकारों का हवाला

याचिका में भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लेख किया गया है। परिवार का कहना है कि विदेश में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और इस मामले में तत्काल मानवीय एवं कूटनीतिक हस्तक्षेप आवश्यक है।

अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और केंद्र सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की नजरें टिकी हैं।