आदिवासी महाजुटान में गूंजा परिसीमन का विरोध, राहुल गांधी का संदेश- यह सिर्फ सीटों का नहीं, हक और अधिकार की लड़ाई
रांची: झारखंड में प्रस्तावित लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन को लेकर रविवार, 30 अगस्त को रांची के मोरहाबादी मैदान में आदिवासी एकता महाजुटान का आयोजन किया गया। राज्य के अलग-अलग जिलों से आदिवासी समाज के लोग रांची पहुंचे। मुंडा, उरांव, संथाल, हो, खड़िया समेत विभिन्न जनजातीय समुदायों की भागीदारी रही। महाजुटान में मुख्य मुद्दा परिसीमन के दौरान आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आरक्षित सीटों को लेकर जताई जा रही चिंता रही। आयोजकों का कहना है कि विरोध परिसीमन का नहीं, बल्कि ऐसी प्रक्रिया का है जिससे आदिवासी समाज का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर होने की आशंका है। महाजुटान में आदिवासी संगठनों की ओर से पांच प्रमुख मांगें रखी गईं। पहली मांग है कि परिसीमन के दौरान आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या किसी भी स्थिति में कम नहीं की जाए। साथ ही पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में आदिवासी प्रतिनिधित्व बढ़ाने और आरक्षित सीटों को सुरक्षित रखने की मांग की गई। दूसरी मांग आदिवासी जमीन के अवैध हस्तांतरण को रद्द कर जमीन मूल मालिकों को वापस दिलाने की रही। इसके लिए CNT और SPT एक्ट के सख्ती से पालन की मांग उठाई गई। तीसरी मांग पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों में संवैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन के जरिए होने वाली बाहरी बसावट को नियंत्रित करने की रही। चौथी मांग राज्यपाल द्वारा पांचवीं अनुसूची के तहत प्राप्त संवैधानिक शक्तियों के प्रभावी इस्तेमाल की रही। वहीं पांचवीं मांग पिछले 75 वर्षों में हुए विस्थापन, भूमि नुकसान और सांस्कृतिक क्षति का आकलन कर प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार की गारंटी देने की रही। महाजुटान में लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का संदेश पढ़कर सुनाया। राहुल गांधी ने कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाने पर खेद जताते हुए आदिवासी समाज के अधिकार, पहचान और सम्मान की लड़ाई में साथ खड़े रहने की बात कही। संदेश में राहुल गांधी ने संविधान सभा में आदिवासी समाज की आवाज उठाने वाले जयपाल सिंह मुंडा को याद किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी अधिकार कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण हैं और संविधान की पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून तथा वन अधिकार कानून आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा की सोच पर आधारित हैं। राहुल गांधी के संदेश में यह भी कहा गया कि विकास का मतलब विस्थापन नहीं, बल्कि लोगों की भागीदारी, सहमति और सम्मान के साथ प्रगति होना चाहिए। उन्होंने झारखंड के संसाधनों पर यहां के लोगों की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत बताई। संदेश का समापन “जय जोहार” के साथ हुआ। सामाजिक कार्यकर्ता दयामनी बारला ने कहा कि आदिवासी समाज अपनी ताकत को याद करने के लिए महाजुटान में पहुंचा है। उन्होंने कहा कि झारखंड की लड़ाई में आदिवासी समाज की बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने परिसीमन में आदिवासी आरक्षित सीटों के संभावित बदलाव का विरोध करते हुए कहा कि यदि आदिवासियों का प्रतिनिधित्व कम करने का प्रयास किया गया तो आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा की बात भी कही। पश्चिमी सिंहभूम से भगवान बिरसा मुंडा के अनुयायी भी महाजुटान में शामिल हुए। बिरसाइयत समाज से जुड़े लोगों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा और सामाजिक पहचान के साथ कार्यक्रम में भाग लिया। जानकारी के अनुसार पश्चिमी सिंहभूम के देवगांव, बंदगांव, बड़की और बिरबा क्षेत्र से बिरसाइयत समाज के लोग रांची पहुंचे। उन्होंने आदिवासी अधिकार, पहचान और अस्मिता से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद करने की बात कही। आदिवासी समन्वय समिति के संयोजक लक्ष्मी नारायण मुंडा ने कहा कि महाजुटान के माध्यम से परिसीमन की प्रक्रिया का विरोध किया जा रहा है। उन्होंने पिछले दशकों में हुए विस्थापन और भूमि नुकसान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आदिवासी समाज के हितों को ध्यान में रखकर नीतियां बनाई जानी चाहिए। महाजुटान में झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, बंधु तिर्की, कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, प्रदीप यादव, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय समेत कांग्रेस के कई नेता शामिल हुए। के. राजू रविवार को रांची पहुंचे। बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। इसके बाद वे मोरहाबादी मैदान के लिए रवाना हुए। महाजुटान को लेकर प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। मोरहाबादी मैदान और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़े वाहनों के परिचालन में बदलाव किया गया और वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था की गई। कार्यक्रम से पहले मोरहाबादी मैदान में झारखंड के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देने की भी तैयारी की गई थी। प्रवेश द्वार के सामने भगवान बिरसा मुंडा, गंगा नारायण सिंह, नीलांबर-पीतांबर, फूलो-झानो और रामदयाल मुंडा समेत अन्य वीर क्रांतिकारियों के कटआउट लगाए गए।आरक्षित सीटें कम नहीं करने की मांग
राहुल गांधी का संदेश- अधिकार और सम्मान की लड़ाई में साथ
दयामनी बारला ने कहा- सीटें घटाई गईं तो आर-पार की लड़ाई
बिरसाइयत समाज की भी रही भागीदारी
आदिवासी समन्वय समिति ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस के कई नेता हुए शामिल
मोरहाबादी में सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था















