देवघर जिले के पालोजोरी प्रखंड अंतर्गत धावा पंचायत में मनरेगा योजना के तहत तालाब निर्माण में कथित घोटाले का मामला सामने आने के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है। मामले के तूल पकड़ने के बाद सोमवार को पालोजोरी की मनरेगा बीपीओ हेलेना हेंब्रम तेलंगा गांव पहुंचीं और लाभुक मोतीलाल मुर्मू की जमीन पर योजना संख्या 8/23–24 के तहत 100/100 तालाब निर्माण कार्य की जांच की।जांच के दौरान बीपीओ ने मीडिया के सवालों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और कहा कि जांच पूरी कर प्रतिवेदन जमा करने के बाद ही कुछ बताया जा सकेगा। हालांकि उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों से राशि की शत प्रतिशत रिकवरी की जाएगी।बताया जा रहा है कि इस योजना में मजदूरों ने अभी तक काम भी शुरू नहीं किया था लेकिन कागजों पर फर्जी मस्टर रोल भरकर करीब 29 हजार रुपये की मजदूरी का भुगतान निकाल लिया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार नियमों को दरकिनार कर रात के अंधेरे में जेसीबी मशीन से काम कराया जा रहा था, जिसके निशान मौके पर स्पष्ट दिखाई दे रहे थे।खबर प्रसारित होने के बाद विभाग और बिचौलियों में हड़कंप मच गया। जांच टीम के पहुंचने से पहले ही जेसीबी के निशानों को मिटाने के लिए जल्दबाजी में मजदूरों को काम पर लगा दिया गया, जिसे साक्ष्य मिटाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकार जहां मजदूरों को मनरेगा के तहत रोजगार देने का दावा करती है, वहीं पालोजोरी में बिचौलिए और भ्रष्ट कर्मी मिलकर मजदूरों के हक पर डाका डाल रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कार्रवाई करता है या फिर जांच केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है।