पलामू: पलामू के उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत के नाम और पहचान का इस्तेमाल कर एक बार फिर फर्जी WhatsApp अकाउंट बनाए जाने का मामला सामने आया है। खास बात यह है कि एक सप्ताह के भीतर यह दूसरी घटना है, जब डीसी के नाम पर फर्जी WhatsApp अकाउंट बनाकर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की गई है।

इससे पहले 26 अगस्त को भी पलामू डीसी के नाम पर फर्जी WhatsApp अकाउंट बनाए जाने की घटना सामने आई थी। लगातार दूसरी बार ऐसी घटना सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की अपील की है।


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अधिकारियों के नाम पर फर्जी अकाउंट बना रहे साइबर अपराधी

प्रशासन के अनुसार, साइबर अपराधी अब अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की पहचान का दुरुपयोग कर फर्जी सोशल मीडिया और मैसेजिंग अकाउंट बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे अकाउंट के जरिए लोगों को मैसेज भेजकर भ्रमित करने या आर्थिक लेनदेन के लिए दबाव बनाने की आशंका रहती है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति को यदि किसी संदिग्ध नंबर से अधिकारी के नाम पर मैसेज मिले या पैसे भेजने की मांग की जाए, तो बिना सत्यापन के किसी तरह का भुगतान नहीं करना चाहिए।

संदिग्ध WhatsApp मैसेज आए तो तुरंत करें शिकायत

जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अधिकारी या जनप्रतिनिधि के नाम से आने वाले किसी भी संदिग्ध WhatsApp मैसेज, कॉल या आर्थिक मांग पर तुरंत भरोसा न करें।

किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर संबंधित अधिकारी या पुलिस को तत्काल इसकी जानकारी देने की अपील की गई है। प्रशासन का कहना है कि साइबर अपराध से बचने के लिए पहचान और नंबर का सत्यापन करना बेहद जरूरी है।

पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी का WhatsApp भी हुआ था हैक

इसी बीच पलामू में साइबर अपराध से जुड़ी एक और घटना सामने आ चुकी है। मंगलवार को पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी का WhatsApp अकाउंट हैक होने की जानकारी सामने आई थी।

अकाउंट हैक होने के बाद लोगों को उनके नंबर से आने वाले किसी भी मैसेज या भुगतान संबंधी अनुरोध पर भरोसा नहीं करने की अपील की गई थी। हालांकि, देर रात उनका WhatsApp अकाउंट दोबारा ठीक कर लिया गया।

लगातार घटनाओं से बढ़ी साइबर सुरक्षा की चिंता

एक सप्ताह के भीतर पलामू डीसी के नाम पर दूसरी बार फर्जी WhatsApp अकाउंट बनाए जाने और पूर्व मंत्री का अकाउंट हैक होने की घटना ने जिले में साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या WhatsApp पर किसी अधिकारी अथवा जनप्रतिनिधि के नाम से आने वाले संदेशों की बिना सत्यापन के प्रतिक्रिया न दें और किसी भी तरह का आर्थिक लेनदेन न करें।

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