विश्वविद्यालय-कॉलेजों में शिकायतें दबाना अब नहीं होगा आसान, झारखंड में तय हुई कार्रवाई की समय-सीमा
रांची: झारखंड के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की शिकायतों को लंबे समय तक लंबित रखना अब आसान नहीं होगा। झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 में शिकायतों के निपटारे के लिए अलग-अलग समितियों और न्यायाधिकरण की व्यवस्था की गई है। इसके तहत शिकायत मिलने के बाद संबंधित स्तर पर कार्रवाई और निर्णय के लिए समय-सीमा तय की गई है। नई व्यवस्था का उद्देश्य विश्वविद्यालय और कॉलेज प्रशासन को अधिक जवाबदेह बनाना है। छात्रों की शैक्षणिक, प्रवेश और प्रशासनिक समस्याओं से लेकर शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के सेवा संबंधी विवादों तक के लिए अलग-अलग शिकायत निवारण तंत्र निर्धारित किया गया है। छात्रों की शैक्षणिक, प्रवेश, प्रशासनिक और अन्य समस्याओं के समाधान के लिए विश्वविद्यालय और कॉलेज स्तर पर छात्र शिकायत निवारण समिति (SGRC) का गठन किया जाएगा। शिकायत मिलने के बाद समिति को 15 कार्य दिवसों के भीतर अपनी रिपोर्ट और सिफारिश देनी होगी। यानी छात्र की शिकायत को अनिश्चितकाल तक लंबित रखने की गुंजाइश कम होगी। इसके दायरे में छात्रसंघ चुनाव और चुनाव आचार संहिता से संबंधित विवाद भी शामिल किए गए हैं। इसके अलावा अधिनियम में UGC के नियमों के तहत लोकपाल की नियुक्ति का भी प्रावधान किया गया है। शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की सेवा से संबंधित शिकायतों के लिए कर्मचारी शिकायत निवारण समिति (EGRC) की व्यवस्था की गई है। वेतन, सेवा शर्त, पदोन्नति और अन्य सेवा विवाद इस समिति के समक्ष रखे जा सकेंगे। समिति को शिकायत दर्ज होने के तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला देना होगा। इस समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश या कम से कम 10 वर्ष का अनुभव रखने वाले मान्यता प्राप्त अधिवक्ता करेंगे। यदि किसी कर्मचारी को बर्खास्तगी, निलंबन, पदावनति या EGRC के फैसले से असहमति है, तो उसे 30 दिनों के भीतर कर्मचारी शिकायत निवारण न्यायाधिकरण (EGRT) में अपील करने का अधिकार होगा। न्यायाधिकरण की अध्यक्षता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या निर्धारित योग्यता रखने वाले व्यक्ति द्वारा की जाएगी। अधिनियम के प्रावधान के अनुसार न्यायाधिकरण का फैसला अंतिम और संबंधित पक्षों के लिए बाध्यकारी होगा। नए प्रावधानों में केवल शिकायतों के निपटारे की समय-सीमा ही तय नहीं की गई है, बल्कि न्यायाधिकरण के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए आर्थिक दंड का भी प्रावधान किया गया है। यदि विश्वविद्यालय या कॉलेज पहली बार न्यायाधिकरण के आदेश का पालन नहीं करता है, तो 10 हजार से 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। दूसरी या उसके बाद की बार आदेश का उल्लंघन होने पर जुर्माने की राशि बढ़कर 50 हजार से 5 लाख रुपये तक हो सकती है। इसके बावजूद आदेश लागू नहीं किया गया तो पालन होने तक हर दिन 2 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है। झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 में शिकायतों के निपटारे के लिए समय-सीमा और अपील की व्यवस्था किए जाने से विश्वविद्यालय एवं कॉलेज प्रशासन की जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश की गई है। खासकर छात्रों और कर्मचारियों के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि शिकायतों के निपटारे के लिए अलग-अलग मंच और निर्धारित समय-सीमा उपलब्ध होगी। वहीं, आदेशों का पालन नहीं करने पर आर्थिक दंड का प्रावधान प्रशासन पर अनुपालन का दबाव बनाएगा।छात्रों की शिकायत पर 15 कार्य दिवस में देनी होगी रिपोर्ट
कर्मचारियों के वेतन और प्रमोशन विवाद पर भी समय-सीमा
नौकरी से जुड़े फैसले के खिलाफ 30 दिन में अपील
विश्वविद्यालय-कॉलेजों ने आदेश नहीं माना तो आर्थिक दंड
पहली बार उल्लंघन पर 10 हजार से 1 लाख रुपये तक जुर्माना
दूसरी बार गलती पर 50 हजार से 5 लाख रुपये तक दंड
आदेश नहीं माना तो हर दिन 2 हजार रुपये अतिरिक्त
शिकायत व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश















