हजारीबाग: नीलांबर-पीतांबर चौक के समीप अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर स्थानीय दुकानदारों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लंबे समय से यहां दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे व्यापारियों का कहना है कि कार्रवाई की आशंका के बीच उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। दुकानदारों के अनुसार, कुछ दुकानें वर्ष 1989 से, जबकि कुछ वर्ष 2002 से यहां संचालित हैं।

जमीन मालिक की सहमति से दुकान चलाने का दावा

दुकानदारों का कहना है कि जिस जमीन पर वे कारोबार कर रहे हैं, वह प्रेम मुंडा की है और उनकी सहमति से ही दुकानें संचालित की जा रही हैं। व्यापारियों के अनुसार वे नियमित रूप से जमीन का किराया भी देते आ रहे हैं। उनका दावा है कि उन्होंने मनमाने तरीके से जमीन पर कब्जा नहीं किया, बल्कि जमीन मालिक की अनुमति और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर वर्षों से कारोबार कर रहे हैं।

हाईकोर्ट के आदेश को लेकर दुकानदारों का अपना पक्ष

दुकानदारों ने प्रशासनिक कार्रवाई और हाईकोर्ट के आदेश को लेकर भी अपना पक्ष रखा है। उनका दावा है कि अंचल कार्यालय की ओर से अतिक्रमण का मामला दर्ज किया गया, जबकि जमीन मालिक को लेकर वैसी कार्रवाई नहीं की गई। दुकानदारों के अनुसार, बाद में जमीन मालिक की ओर से कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई और उनके अधिवक्ता ने अंचल अधिकारी के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत करने का प्रयास किया।

दुकानदारों का कहना है कि अंचल स्तर से दुकानें तोड़े जाने का आदेश मिलने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था। उनके अनुसार, हाईकोर्ट से उन्हें राहत मिली थी। बाद में जिला प्रशासन की ओर से भी हाईकोर्ट में आवेदन दिया गया, जिसके बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

वर्तमान में दुकानदार डीसी कोर्ट और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष अपना पक्ष और दस्तावेज रख रहे हैं।

24 डिसमिल जमीन में चार दुकानों का दावा

दुकानदारों के अनुसार विवादित जमीन खाता नंबर 96 और प्लॉट नंबर 301 में दर्ज करीब 24 डिसमिल की है। उनका कहना है कि इसी हिस्से में चार दुकानदार दुकान बनाकर कारोबार कर रहे हैं।

दुकानदारों का तर्क है कि उपलब्ध जमीन का आकार और वर्षों से संचालित दुकानों की स्थिति को देखते हुए पूरे मामले की वास्तविक स्थल जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लिया जाए, ताकि वर्षों से कारोबार कर रहे लोगों के पक्ष को भी उचित रूप से सुना जा सके।

इस उम्र में कहां जाएंगे

लंबे समय से दुकान चला रहे बुजुर्ग दुकानदारों का कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा इसी कारोबार में लगा दिया है। अब अचानक दुकान हटने की स्थिति में उनके लिए नया रोजगार खड़ा करना मुश्किल होगा।

दुकानदारों ने प्रशासन से मांग की है कि किसी भी कार्रवाई से पहले उनके दस्तावेज, जमीन मालिक की सहमति, किराये से संबंधित रिकॉर्ड और न्यायालय में चल रहे मामले की वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखा जाए।

दुकानदारों का कहना है कि वे कानून और न्यायालय की प्रक्रिया का सम्मान करते हैं, लेकिन उनके पुनर्वास और रोजी-रोटी के सवाल पर भी प्रशासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए।