चांडिल: देश में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने, अंधविश्वास और छद्म विज्ञान के खिलाफ जनजागरूकता फैलाने तथा शिक्षा और अनुसंधान व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शनिवार को चांडिल में ‘इंडिया मार्च फॉर साइंस’ का आयोजन किया गया। ब्रेकथ्रू साइंस सोसाइटी के तत्वावधान में आयोजित मार्च में स्कूली बच्चों, शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और विज्ञान प्रेमियों ने हिस्सा लिया।

प्रतिभागियों ने विभिन्न मांगों से जुड़ी तख्तियां लेकर वैज्ञानिक चेतना, तार्किक सोच और बेहतर शिक्षा व्यवस्था के पक्ष में आवाज बुलंद की।

अंधविश्वास और छद्म विज्ञान के खिलाफ जागरूकता की मांग

मार्च के दौरान वक्ताओं ने कहा कि विज्ञान और तकनीक तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन समाज में अंधविश्वास और अवैज्ञानिक सोच को बढ़ावा मिलना चिंता का विषय है। उन्होंने वैज्ञानिक तथ्यों और प्रमाणों पर आधारित सोच को समाज में मजबूत करने की जरूरत बताई।

आयोजकों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए भी वैज्ञानिक और साक्ष्य आधारित नीतियां लागू करने की मांग की। पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक में भारत की स्थिति का उल्लेख करते हुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया गया।

शिक्षा नीति और पाठ्यक्रम में वैज्ञानिक सोच पर जोर

वक्ताओं ने शिक्षा नीति और पाठ्यक्रमों में हो रहे बदलावों को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय तर्क, वैज्ञानिक सोच और आलोचनात्मक चिंतन से जोड़ना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में अंधविश्वास और अप्रमाणित दावों को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए। साथ ही संविधान के अनुच्छेद 51ए(एच) में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने से जुड़े दायित्व को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग की गई।

परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और NTA को लेकर उठी मांग

मार्च के दौरान परीक्षा व्यवस्था में सुधार का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर चिंता जताते हुए परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की मांग की।

आयोजकों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को समाप्त करने की मांग भी रखी।

शिक्षा बजट बढ़ाने और सरकारी स्कूलों में बेहतर लैब की मांग

आयोजकों ने शिक्षा के लिए बजट बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि केंद्रीय बजट में कम से कम 10 प्रतिशत और राज्य बजट में 30 प्रतिशत राशि शिक्षा के लिए आवंटित की जानी चाहिए।

इसके अलावा सरकारी स्कूलों में बेहतर विज्ञान प्रयोगशालाएं उपलब्ध कराने और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करने की मांग की गई।

रिसर्च में निवेश और फेलोशिप में देरी दूर करने की मांग

विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में निवेश बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि शोध को मजबूत बनाने के लिए शोधार्थियों को बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने के साथ उनकी फेलोशिप में होने वाली देरी को दूर करना जरूरी है।

डायन प्रथा और अंधविश्वास के खिलाफ कानून की मांग

मार्च में डायन प्रथा, मानव बलि, झाड़-फूंक और अंधविश्वास के नाम पर होने वाले शोषण का मुद्दा भी उठाया गया।

आयोजकों ने ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए देशव्यापी एंटी-ब्लैक-मैजिक कानून बनाने की मांग की, ताकि अंधविश्वास के नाम पर होने वाले शोषण और हिंसा पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

अनंत कुमार महतो ने कहा- विज्ञान की रक्षा सामूहिक भविष्य की रक्षा

कार्यक्रम के समापन पर ब्रेकथ्रू साइंस सोसाइटी झारखंड चैप्टर की राज्य सचिव मंडली के सदस्य एवं यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट ऑफ मैथेमेटिक्स, रांची के रिसर्च स्कॉलर अनंत कुमार महतो ने कहा कि विज्ञान की रक्षा ही सामूहिक भविष्य की रक्षा है।

उन्होंने कहा कि यदि उठाई गई मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती है तो आंदोलन को आगे और व्यापक किया जाएगा।

इन लोगों की रही महत्वपूर्ण भूमिका

कार्यक्रम को सफल बनाने में विज्ञान शिक्षक जयदीप प्रमाणिक, अमृता महतो, पूजा प्रमाणिक, खुशबू महतो, बुद्धेश्वर कुंभकार, रामनाथ कुंभकार, मनीष महतो, त्रिलोचन महतो, कार्तिक महतो, कुणाल सिंह सरदार समेत अन्य लोगों की भूमिका रही।