झारखंड सुशासन पार्टी की लॉन्चिंग के साथ गिरिडीह में सियासी घमासान, संजय सिंह पर संजीव सिन्हा ने दागे तीखे सवाल
गिरिडीह: झारखंड की राजनीति में नई पार्टी के आगाज के साथ गिरिडीह में सियासी हलचल तेज हो गई है। झारखंड सुशासन पार्टी की लॉन्चिंग के मौके पर शिक्षाविद संजीव सिन्हा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के जिलाध्यक्ष संजय सिंह को निशाने पर लिया। उन्होंने संगठन के संविधान, जिलाध्यक्ष पद पर उनकी नियुक्तियों, JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के आंदोलन के दौरान वायरल हुए कथित ऑडियो और जलछाजन विभाग से उनके बेटे को कथित भुगतान जैसे कई मुद्दों पर सवाल उठाए। संजीव सिन्हा ने संजय सिंह को खुली चुनौती देते हुए इन सभी सवालों का सार्वजनिक जवाब देने की मांग की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजीव सिन्हा ने सबसे पहले JMM के संगठनात्मक संविधान का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के संविधान के अनुसार कोई भी व्यक्ति दो बार से अधिक जिलाध्यक्ष नहीं बन सकता। ऐसे में संजय सिंह को निर्धारित सीमा से अधिक बार जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी कैसे सौंपी गई? उन्होंने सवाल किया कि क्या संगठन के नियम केवल सामान्य कार्यकर्ताओं के लिए हैं या पदाधिकारियों पर भी समान रूप से लागू होते हैं? संजीव सिन्हा ने JMM के शीर्ष नेतृत्व से इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। संजीव सिन्हा ने JPSC, JSSC और CGL अभ्यर्थियों के आंदोलन के दौरान संजय सिंह से जुड़ा कथित ऑडियो वायरल होने का मामला भी उठाया। उनके मुताबिक, इस ऑडियो में एक अभ्यर्थी के अभिभावक से बातचीत के दौरान इंटरव्यू में सेटिंग-गेटिंग से जुड़ी बातें सुनाई देने का आरोप है। हालांकि, ऑडियो की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि ऑडियो वायरल होने के बाद संजय सिंह की ओर से साइबर थाने में शिकायत देकर FIR दर्ज कराने की बात कही गई थी। लेकिन अब तक इस मामले में क्या कार्रवाई हुई, यह स्पष्ट नहीं है। संजीव सिन्हा ने दावा किया कि संजय सिंह की ओर से साइबर थाने में आवेदन तक नहीं दिया गया। उन्होंने सवाल किया कि यदि ऑडियो फर्जी था तो उसकी जांच के लिए कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई? वहीं, यदि मामला गंभीर था तो जांच की प्रगति सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजीव सिन्हा ने संजय सिंह के बेटे को जलछाजन विभाग से कथित तौर पर 45 हजार रुपये मिलने के मामले पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि यह राशि किस योजना के तहत, किस काम के लिए और किस प्रक्रिया से दी जा रही है? भुगतान का आधार क्या है? उन्होंने संबंधित विभाग से पूरे मामले की जांच कर भुगतान की वास्तविक स्थिति और उसके औचित्य को सार्वजनिक करने की मांग की। संजीव सिन्हा ने संजय सिंह के साथ SPDC के संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि आखिर SPDC की भूमिका क्या है और संजय सिंह के साथ उसका किस तरह का जुड़ाव है? उन्होंने इस संबंध में भी स्पष्ट जवाब देने की मांग की। झारखंड सुशासन पार्टी की लॉन्चिंग के साथ हुई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने गिरिडीह की स्थानीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। संजीव सिन्हा ने एक के बाद एक कई मुद्दे उठाकर JMM जिलाध्यक्ष संजय सिंह को जवाब देने की चुनौती दी है। हालांकि, ये सभी आरोप और सवाल संजीव सिन्हा की ओर से लगाए गए हैं। वायरल ऑडियो की प्रामाणिकता और भुगतान से जुड़े तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। संजय सिंह का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।जिलाध्यक्ष की कुर्सी पर कितनी बार मिली जिम्मेदारी?
वायरल ऑडियो पर FIR को लेकर सवाल
बेटे को 45 हजार रुपये मिलने का मामला भी उठाया
SPDC की भूमिका पर भी मांगा जवाब
अब संजय सिंह के जवाब पर टिकी निगाहें















