लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 30 अक्टूबर को एक बड़े सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन प्रस्तावित है। गोमती नगर स्थित मान्यवर श्री कांशीराम जी सांस्कृतिक स्थल पर 51 हजार जोड़ों के सामूहिक विवाह का लक्ष्य रखा गया है। यह आयोजन ‘दहेज मुक्त भारत अभियान’ के तहत किया जा रहा है। इसका उद्देश्य समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ जागरूकता फैलाना और बिना दहेज के सादगीपूर्ण विवाह को बढ़ावा देना है।

इस आयोजन का नेतृत्व राष्ट्र संघ विश्व शांति मिशन के संस्थापक सुरेंद्र गुप्ता कर रहे हैं। आयोजकों के अनुसार, इस कार्यक्रम के माध्यम से बड़ी संख्या में जोड़ों को एक मंच पर विवाह के बंधन में बांधने की योजना है। आयोजन को सामाजिक जागरूकता और सामूहिक सहभागिता से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, 51 हजार जोड़ों का लक्ष्य अपने आप में बेहद बड़ा है। ऐसे में पंजीकरण, तैयारियों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

दहेज मुक्त भारत अभियान के तहत आयोजन

देश में दहेज प्रथा आज भी कई परिवारों के लिए सामाजिक और आर्थिक परेशानी का कारण बनी हुई है। शादी के नाम पर दहेज की मांग से परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है। कई बार दहेज की मांग वैवाहिक रिश्तों में विवाद और घरेलू हिंसा की वजह भी बन जाती है।

इसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से इस सामूहिक विवाह कार्यक्रम को ‘दहेज मुक्त भारत अभियान’ के तहत आयोजित करने की योजना बनाई गई है। आयोजकों का कहना है कि विवाह को दिखावे और अनावश्यक खर्च से मुक्त कर सादगीपूर्ण तरीके से संपन्न कराने का संदेश दिया जाएगा।

कौन हैं आयोजन के सूत्रधार सुरेंद्र गुप्ता?

इस कार्यक्रम की अगुवाई राष्ट्र संघ विश्व शांति मिशन के संस्थापक सुरेंद्र गुप्ता कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में प्रस्तावित इस आयोजन के जरिए दहेज मुक्त विवाह और सामाजिक समरसता का संदेश जन-जन तक पहुंचाने की योजना है।

आयोजकों का लक्ष्य है कि सामूहिक विवाह के माध्यम से बड़ी संख्या में जोड़ों को नया जीवन शुरू करने का अवसर मिले। इस पहल को दहेज जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ जागरूकता अभियान के रूप में भी प्रस्तुत किया जा रहा है।

गोमती नगर के कांशीराम सांस्कृतिक स्थल पर जुटेंगे हजारों लोग

लखनऊ के गोमती नगर स्थित मान्यवर श्री कांशीराम जी सांस्कृतिक स्थल पर प्रस्तावित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वर-वधू और उनके परिजनों के शामिल होने की संभावना है।

इतने बड़े स्तर पर आयोजन के लिए विवाह की रस्मों के साथ भोजन, पेयजल, चिकित्सा सुविधा, स्वच्छता, सुरक्षा और यातायात प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं बेहद महत्वपूर्ण होंगी। 51 हजार जोड़ों और उनके परिजनों की संभावित मौजूदगी को देखते हुए भीड़ नियंत्रण और सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना आयोजकों के लिए बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए प्रशासनिक समन्वय और पर्याप्त इंतजाम की आवश्यकता होगी।

51 हजार जोड़ों के विवाह को लेकर तैयारियां अहम

इस आयोजन को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने बड़े पैमाने पर विवाह की प्रक्रिया किस तरह पूरी की जाएगी। जोड़ों का पंजीकरण, दस्तावेजों का सत्यापन, विवाह की धार्मिक एवं कानूनी प्रक्रिया और विवाह प्रमाणपत्र की व्यवस्था जैसे कई पहलू महत्वपूर्ण होंगे।

इसके अलावा यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि कार्यक्रम के लिए अब तक कितने जोड़ों का पंजीकरण हुआ है और वास्तव में कितने जोड़े विवाह समारोह में शामिल होंगे। इन आंकड़ों से आयोजन के वास्तविक पैमाने और तैयारियों की स्थिति सामने आएगी।

दहेज प्रथा के खिलाफ दिया जाएगा सामाजिक संदेश

सामूहिक विवाह का उद्देश्य केवल विवाह संपन्न कराना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव का संदेश देना भी है। दहेज के कारण आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में बिना दहेज विवाह को प्रोत्साहित करने की पहल सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

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