रांची: माध्यमिक आचार्य नियुक्ति विज्ञापन संख्या 02/2025 से जुड़ी जनहित याचिका (PIL) पर झारखंड हाईकोर्ट ने जेएसएससी का पक्ष जानने के बाद मामले को क्लोज कर दिया। सुनवाई के दौरान नियुक्ति प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति और अलग-अलग न्यायिक आदेशों के कारण उत्पन्न परिस्थितियों को लेकर चर्चा हुई।मामले में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने अदालत को बताया कि 877 अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए राज्य सरकार को अनुशंसा भेजी जा चुकी है। वहीं 204 पदों के लिए उपयुक्त अभ्यर्थी नहीं मिल सके हैं।इसके अलावा 292 अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन में कुछ त्रुटियां पाई गई हैं। इन अभ्यर्थियों से संबंधित मामलों में जेएसएससी की ओर से शो-कॉज मांगा गया है।

नियुक्ति प्रक्रिया की समय सीमा तय करने का आग्रह

सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से अदालत से माध्यमिक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय अवधि निर्धारित करने का आग्रह किया गया।इस पर जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने अदालत को बताया कि माध्यमिक आचार्य नियुक्ति मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 2819 अभ्यर्थियों की पुनर्परीक्षा को सही माना था।वहीं, हाईकोर्ट की एकल पीठ ने एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर पुनर्परीक्षा कराए जाने को गलत बताया था। जेएसएससी की ओर से अदालत को बताया गया कि दोनों आदेशों के कारण मामले की परिस्थितियां अलग हो गई हैं।

FIR के आदेश का भी दिया गया हवाला

मामले में एकल पीठ की ओर से FIR दर्ज करने का आदेश दिए जाने का भी उल्लेख सुनवाई के दौरान किया गया। खंडपीठ ने इन परिस्थितियों को देखते हुए कहा कि मौजूदा स्थिति में माध्यमिक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा करने के लिए समय सीमा निर्धारित नहीं की जा सकती।इसके बाद अदालत ने जेएसएससी का पक्ष जानने के बाद संबंधित जनहित याचिका को क्लोज कर दिया।फिलहाल 877 अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए सरकार को भेजी गई अनुशंसा, 204 रिक्त पदों के लिए उपयुक्त अभ्यर्थी नहीं मिलने और 292 अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन में सामने आई त्रुटियों को लेकर आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

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