हजारीबाग:  सरकारी जमीन के स्वामित्व और उसके हस्तांतरण को लेकर हजारीबाग में एक नया विवाद सामने आया है। पदमा अंचल की 6.82 एकड़ जमीन विनोबा भावे विश्वविद्यालय को दान किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का दावा है कि जिस खाता की जमीन दान की गई है, उसकी कुल 62.75 एकड़ भूमि पर बिहार भूमि सुधार अधिनियम, 1950 की धारा 4(H) लागू होने का उल्लेख राजस्व अभिलेखों में है। ऐसे में जमीन के स्वामित्व और दान की वैधता की जांच की मांग उठी है। उपायुक्त ने शिकायत और दस्तावेजों को जांच के लिए अपर समाहर्ता के पास भेज दिया है।

62.75 एकड़ जमीन पर धारा 4(H लागू होने का दावा

मामले से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, पदमा अंचल के थाना संख्या-27 और खाता संख्या-746 के अंतर्गत कुल 62.75 एकड़ जमीन दर्ज है। बताया गया है कि अपर समाहर्ता, हजारीबाग ने पत्रांक 3670/रा०, दिनांक 1 अक्टूबर 2022 के जरिए इस जमीन के विभिन्न प्लॉटों की खरीद-बिक्री पर रोक लगाई थी। यह कार्रवाई बिहार भूमि सुधार अधिनियम, 1950 की धारा 4(H) के तहत भूमि के आने के आधार पर किए जाने की बात कही गई है।

इससे पहले पदमा के अंचल अधिकारी ने भी 28 मई 2017 को पत्रांक 324 के माध्यम से अपनी रिपोर्ट में खाता संख्या-746 की पूरी 62.75 एकड़ जमीन को धारा 4(H) के अंतर्गत बताया था।

राजस्व दस्तावेजों के आधार पर उठाए गए सवाल

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस मामले से संबंधित पंजी-2, अंचल अमीन की रिपोर्ट, धारा 4(H) का इंडेक्स और वाद संख्या 14/1953-54 के आदेश की प्रतियां भी उपलब्ध हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर उन्होंने जमीन के स्वामित्व और हस्तांतरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

इसी खाता की 26.83 एकड़ जमीन पर झारखंड सशस्त्र पुलिस प्रशिक्षण केंद्र संचालित है। शिकायत में बताया गया है कि इस हिस्से का अधिग्रहण झारखंड सरकार ने किया था। ऐसे में शेष जमीन पर किसका वैध स्वामित्व है और उसे दान करने का अधिकार किसके पास था, यह जांच का प्रमुख विषय बन गया है।

30 एकड़ से शुरू हुई थी जमीन देने की घोषणा

बताया गया है कि विनोबा भावे विश्वविद्यालय को पहले 30 एकड़, फिर 20 एकड़ और बाद में 11.90 एकड़ जमीन देने की घोषणा की गई थी। अंततः 6.82 एकड़ जमीन दान के लिए उपलब्ध कराए जाने की प्रक्रिया पूरी हुई। पूर्व विधायक सौरभ नारायण सिंह की ओर से पदमा स्थित राजमहल और उससे जुड़ी जमीन का यह रकबा झारखंड के राज्यपाल के नाम दान पत्र के माध्यम से विश्वविद्यालय को दिए जाने की बात सामने आई है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जमीन से संबंधित अभिलेखों की पदमा अंचल कार्यालय में तलाश के बावजूद अपेक्षित रिकॉर्ड नहीं मिल सके। इसी आधार पर उन्होंने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराने की मांग की है।

डीसी ने अपर समाहर्ता को सौंपी जांच

सामाजिक कार्यकर्ता मनोज गुप्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट राजेश मिश्रा ने बुधवार को उपायुक्त को दस्तावेजों के साथ लिखित शिकायत सौंपी। उन्होंने 6.82 एकड़ जमीन के दान, उसके वास्तविक स्वामित्व और संबंधित राजस्व अभिलेखों की जांच कराने का आग्रह किया।

उपायुक्त ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आवेदन और उपलब्ध दस्तावेज विस्तृत जांच के लिए अपर समाहर्ता, हजारीबाग को अग्रसारित कर दिए हैं।

जांच के बाद स्पष्ट होगी जमीन की वैधता

अब जांच में यह स्पष्ट होना है कि 6.82 एकड़ जमीन का दान किन राजस्व अभिलेखों और स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों के आधार पर किया गया। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि जमीन के हस्तांतरण के दौरान संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन हुआ था या नहीं। फिलहाल इस मामले में लगाए गए आरोपों की प्रशासनिक जांच होनी बाकी है।