बंदोबस्ती की सरकारी जमीन की कथित बिक्री से हड़कंप, DC कार्यालय ने कटकमदाग CO को सौंपी जांच
हजारीबाग: सरकारी जमीन की
बंदोबस्ती के बाद उसके एक हिस्से की कथित बिक्री का मामला सामने आने के बाद जिला
प्रशासन ने जांच के निर्देश दिए हैं। मामला कटकमदाग अंचल के सिरसी-II मौजा से जुड़ा है। हजारीबाग उपायुक्त
कार्यालय की जिला राजस्व शाखा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अंचल अधिकारी को
नियमानुसार जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।मामला मौजा
सिरसी-II, खाता
संख्या 251 और
प्लॉट संख्या 882 से
संबंधित है। जिला राजस्व शाखा के पत्र में दर्ज जानकारी के अनुसार, उक्त जमीन का कुल रकबा 0.50 एकड़ है और यह गैरमजरुआ भूमि की श्रेणी में
दर्ज है। दस्तावेज के अनुसार, जमीन
की बंदोबस्ती पर्चाधारी वंशी मोची के नाम पर की गई थी।अब इसी जमीन के एक
हिस्से को लेकर सवाल उठे हैं। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि बंदोबस्ती की गई
भूमि में से करीब 0.06 एकड़ जमीन दूसरे व्यक्ति चंद्रराज
गिरी के पक्ष में निबंधित केवाला के जरिए हस्तांतरित की गई। शिकायत
में इस कथित हस्तांतरण से संबंधित निबंधन संख्या 7271 का भी उल्लेख किया गया है। मामले में मुख्य सवाल
यह है कि सरकारी गैरमजरुआ भूमि की बंदोबस्ती के बाद उस पर लागू शर्तें क्या थीं और
क्या बंदोबस्ती की गई जमीन को किसी अन्य व्यक्ति के नाम हस्तांतरित करने की अनुमति
थी।इसके अलावा यह भी
जांच का विषय होगा कि जमीन के हस्तांतरण से पहले सक्षम स्तर से कोई अनुमति ली गई
थी या नहीं और निबंधन के समय भूमि की प्रकृति तथा बंदोबस्ती की शर्तों का परीक्षण
किया गया था या नहीं।इन सभी सवालों का
जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। हजारीबाग अपर
समाहर्ता की ओर से जारी पत्र में संबंधित आवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए कटकमदाग
अंचल अधिकारी को मामले की जांच करने का निर्देश दिया
गया है। पत्र में आवेदन में वर्णित तथ्यों की नियमानुसार जांच-पड़ताल कर आवश्यक
कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।पत्र पर 11 अगस्त 2026 की तारीख दर्ज है। इसके बाद मामला जिला प्रशासन के राजस्व
तंत्र के संज्ञान में आ गया है। अब जांच के दौरान
जमीन के मूल रिकॉर्ड, खतियान,
बंदोबस्ती आदेश, पर्चा, बंदोबस्ती की शर्तें, संबंधित केवाला और निबंधन कार्यालय के
रिकॉर्ड का मिलान किया जाना महत्वपूर्ण होगा।जांच में यह भी देखा
जाएगा कि 0.06 एकड़ जमीन के कथित हस्तांतरण के समय
उसकी कानूनी स्थिति क्या थी और निबंधन किस आधार पर किया गया।यदि जांच में आवेदन
में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो जमीन के कथित हस्तांतरण की वैधता और संबंधित जिम्मेदारियों
को लेकर आगे कार्रवाई का सवाल उठ सकता है। वहीं, यदि रिकॉर्ड से आरोपों की पुष्टि नहीं
होती है, तो मामले की वास्तविक
स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।फिलहाल डीसी कार्यालय
के निर्देश के बाद जांच की जिम्मेदारी कटकमदाग अंचल प्रशासन के पास है। जांच के
बाद ही सरकारी जमीन की बंदोबस्ती से लेकर उसके कथित हस्तांतरण तक की पूरी स्थिति
स्पष्ट हो सकेगी।सरकारी
बंदोबस्ती की जमीन की बिक्री कैसे हुई?
अपर
समाहर्ता ने CO को भेजा पत्र
जांच
में सामने आएगी वास्तविक स्थिति














