साहेबगंज मरीन ड्राइव के लिए गंगा किनारे मिट्टी जांच शुरू
गंगा तट पर बसे
ऐतिहासिक शहर साहेबगंज की तस्वीर अब बदलने
जा रही है। शहर की सुंदरता बढ़ाने के साथ साथ यातायात व्यवस्था
को सुगम बनाने और जाम की समस्या से निजात दिलाने के उद्देश्य से गंगा किनारे मुंबई
की तर्ज पर मरीन ड्राइव का निर्माण किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए
बुधवार से गंगा किनारे मिट्टी जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।पूर्व में
झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय सचिव सह प्रवक्ता पंकज
मिश्रा ने चेंबर के सदस्यों के साथ बैठक के दौरान मरीन ड्राइव समेत
अन्य विकास कार्यों की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि आने वाले समय में
साहेबगंज विकास के मामले में पूरे संथाल परगना में अग्रणी स्थान पर होगा।मिट्टी
जांच का कार्य पश्चिम बंगाल की एक कंपनी द्वारा किया जा रहा है। यह जांच साहेबगंज मनिहारी
गंगा पुल के एप्रोच पथ महादेवगंज से सकरीगली बंदरगाह एप्रोच पथ जमनी
फाटक तक गंगा किनारे की जा रही है। कंपनी के कर्मियों द्वारा चार अलग-अलग स्थानों
से लगभग 50 मीटर गहराई तक मिट्टी
के सैंपल एकत्र किए गए हैं, जिन्हें
जांच के लिए कोलकाता भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद परियोजना की फाइनल
डीपीआर तैयार की जाएगी।प्रस्तावित मरीन ड्राइव गंगा ब्रिज के एप्रोच रोड से शुरू
होकर शोभनपुरभट्टा शकुंतला घाट मुक्तेश्वरधाम घाट
फेरी घाट ओझा टोली घाट चानन घाट मदनशाही होते हुए
समदाघाट जमनी फाटक तक जाएगी और एनएच से जुड़ेगी। इसके निर्माण से शहर में जाम की
समस्या से राहत मिलेगी पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा रोजगार के नए अवसर
सृजित होंगे और कनेक्टिविटी बेहतर होगी।लोक
निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता अजय कुमार ने बताया कि करीब 1236
करोड़ रुपये की लागत से 13 किलोमीटर लंबा मरीन ड्राइव बनाया जाएगा।
इसमें गंगा किनारे 4 लेन
का पुल और जमीन वाले हिस्से में 2 लेन
की सड़क का निर्माण होगा। भगवान बिरसा मुंडा गंगा घाट और ओझा टोली गंगा घाट के पास
रैंप सीढ़ियां फुटपाथ कैफेटेरिया बच्चों के लिए पार्क सेल्फी प्वाइंट सहित
आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किए जाएंगे।मिट्टी जांच की प्रक्रिया शुरू होते ही
स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है और लोग इस परियोजना को
साहेबगंज के विकास की दिशा में मील का पत्थर बता रहे हैं।















