देवघर पालोजोरी प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों में मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं। केंद्र सरकार जहां मनरेगा के तहत 100 दिन रोजगार और पारदर्शिता की बात करती है वहीं जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है।ताजा मामला बगदाहा पंचायत के कुशमा गांव से जुड़ा है, जहां मनरेगा योजना के तहत 60×60 आकार के पॉपुलेशन टैंक के निर्माण कार्य पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्यस्थल पर मानक के अनुसार निर्माण नहीं किया गया। पूरे गड्ढे में केवल सीमित कार्य कर औपचारिकता निभा दी गई जबकि कागजों में पूर्ण कार्य और सरकारी राशि के संपूर्ण उपयोग का उल्लेख किया गया है।स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता बेहद खराब है और मजदूरों से भी अपेक्षित कार्य नहीं कराया गया। आरोप यह भी है कि मनरेगा योजना में बिचौलियों की सक्रिय भूमिका के कारण वास्तविक मजदूरों को न तो नियमित काम मिल पा रहा है और न ही समय पर भुगतान हो रहा है।ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब मनरेगा कार्यों की निगरानी रोजगार सेवक पंचायत मुखिया और प्रखंड स्तरीय अधिकारियों द्वारा की जाती है तो फिर इस तरह की कथित अनियमितताएं कैसे हो रही हैं। इससे प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।ग्रामीणों का दावा है कि यदि निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तो केवल बगदाहा पंचायत ही नहीं बल्कि पालोजोरी प्रखंड के अन्य पंचायतों में भी कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। चर्चा यह भी है कि पूर्व में सामने आए ऐसे मामलों में ठोस कार्रवाई के बजाय केवल औपचारिकता निभाई गई।फिलहाल ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की अपेक्षा जताई है। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और मनरेगा मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।