मधुपुर में वनों की कटाई से आदिवासी आजीविका पर संकट, महिलाओं की बढ़ी चिंता
मधुपुर : संथाल परगना क्षेत्र में
आदिवासी समुदाय की आजीविका पर गहरा संकट मंडरा रहा है. मधुपुर अनुमंडल और आसपास के
इलाकों में बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार वर्षों से वनोपज पर निर्भर रहे हैं.
खासकर महिलाएं जंगलों से दोना-पत्तल,
केंद,
डहुआ,
फलशा,
कमरंगा,
तूत,
जंगली बेर और शरीफा जैसे फल एकत्र कर
बाजार में बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करती रही हैं. लेकिन अब लगातार हो रही वनों की कटाई ने
इस पारंपरिक रोजगार को लगभग समाप्त कर दिया है. जंगल तेजी से सिमट रहे हैं, जिसके कारण वनोपज की
उपलब्धता में भारी कमी आई है. इसका सीधा असर आदिवासी परिवारों की आय पर पड़ रहा है. हालांकि जगदीशपुर, सरपत्ता, बुढ़ैय और फतेहपुर
जैसे कुछ क्षेत्रों में अभी भी सीमित जंगल मौजूद हैं, लेकिन वहां से मिलने
वाली वनोपज जरूरत के मुकाबले बहुत कम है. स्थानीय आदिवासी महिलाओं का कहना है कि
अगर जल्द ही वन कटाई पर रोक नहीं लगाई गई,
तो उनका जीवन और अस्तित्व दोनों संकट
में पड़ जाएंगे. उन्होंने सरकार और प्रशासन से इस दिशा में तत्काल ठोस कदम उठाने
की मांग की है.















