दरभंगा : बिहार के दरभंगा में NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में हुए प्रदर्शन के बाद दर्ज प्राथमिकी के मामले में नगर निगम की डिप्टी मेयर नाजिया हसन की गिरफ्तारी के लिए शनिवार को पुलिस नगर निगम कार्यालय पहुंची। हालांकि, पुलिस के पहुंचने की जानकारी मिलते ही नाजिया हसन कथित तौर पर पिछले दरवाजे से निकलकर वहां से चली गईं, जिससे पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी।

जानकारी के अनुसार, नगर निगम की बैठक के दौरान डिप्टी मेयर नाजिया हसन मेयर अंजुम आरा और नगर आयुक्त के साथ मंच पर मौजूद थीं। इसी दौरान लहेरियासराय और विश्वविद्यालय थाना की पुलिस टीम भारी पुलिस बल के साथ नगर निगम कार्यालय पहुंची। पुलिस की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद नाजिया हसन कथित तौर पर पिछले दरवाजे से बाइक पर बैठकर वहां से निकल गईं।

घटना के बाद मीडिया से बातचीत में नाजिया हसन ने गिरफ्तारी की संभावना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह किसी कार्रवाई से डरने वाली नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने के कारण उन्हें जेल जाना पड़े, तो वह इसके लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को वह "मेडल" की तरह मानती हैं और इसे राजनीतिक प्रताड़ना बताया।

गौरतलब है कि 23 जुलाई को छात्र संगठनों द्वारा आयोजित प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प, पथराव और लाठीचार्ज की घटनाएं हुई थीं। इस मामले में दरभंगा पुलिस ने डिप्टी मेयर नाजिया हसन सहित 54 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की है।

पुलिस के अनुसार, मामले में अब तक 33 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है।

इस समाचार में डिप्टी मेयर नाजिया हसन के बयान उनके सार्वजनिक वक्तव्य पर आधारित हैं। उनके विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है और मामले पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक एवं पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।