पटना: बिहार में शराबबंदी को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। NCAER की रिपोर्ट में शराबबंदी के प्रभावों को लेकर उठाए गए सवालों के बीच बीजेपी नेता और बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने बुधवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी हटाने के लिए कुछ शराब माफिया और शराब प्रेमी लोग बेचैन हैं।

NCAER रिपोर्ट पर क्या बोले दिलीप जायसवाल?

रिपोर्ट में बिहार में शराबबंदी के बावजूद महिलाओं के खिलाफ अपराध और नशीले पदार्थों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए दिलीप जायसवाल ने कहा कि सूखे नशे की समस्या का शराबबंदी से सीधा संबंध नहीं है।

उन्होंने दावा किया कि बिहार में सूखे नशे की लत वाले लोगों का अनुपात देश के कई अन्य राज्यों की तुलना में कम है। उन्होंने कहा कि जहां शराब की बिक्री जारी है, वहां भी सूखे नशे की समस्या बिहार से अधिक देखने को मिलती है।

महिलाओं के खिलाफ अपराध पर भी दिया जवाब

महिलाओं के खिलाफ अपराध में बढ़ोतरी के दावे पर दिलीप जायसवाल ने कहा कि शराबबंदी के बाद शराब पीकर बाहर अपराध करने वालों की संख्या में कमी आई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि शराब पीकर घर में महिलाओं पर होने वाले अत्याचार में भी कमी आई है।

मंत्री ने कहा कि शराबबंदी के खिलाफ दिए जा रहे इन तर्कों से अब बात नहीं बनेगी।

राजस्व के सवाल पर भी मंत्री का पलटवार

शराबबंदी से बिहार सरकार के राजस्व पर पड़ने वाले असर के सवाल पर भी दिलीप जायसवाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने शराब से राजस्व कमाने की सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल पैसा कमाने के लिए शराब को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता।

उन्होंने मीडिया, सत्ता और विपक्ष के साथ-साथ एनजीओ से शराब के नुकसान को लेकर जागरूकता अभियान चलाने की अपील की।

शराबबंदी पर जारी है बहस

NCAER की रिपोर्ट के बाद बिहार में शराबबंदी की सफलता, सामाजिक प्रभाव और राजस्व से जुड़े मुद्दों पर बहस फिर तेज हो गई है। सरकार जहां शराबबंदी को सामाजिक सुधार से जोड़कर देखती है, वहीं इसके आलोचक इसके आर्थिक और सामाजिक प्रभावों पर सवाल उठाते रहे हैं। मंत्री दिलीप जायसवाल के ताजा बयान से यह बहस और तेज होने के संकेत हैं।