तेहरान : ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की अंतिम यात्रा सोमवार को राजधानी तेहरान से शुरू हुई। राजधानी की सड़कों पर लाखों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और पूरे देश में शोक का माहौल देखा गया। यह अंतिम यात्रा ईरान के हालिया इतिहास की सबसे बड़ी जनसभाओं में से एक मानी जा रही है।

बताया जा रहा है कि अंतिम यात्रा करीब 10 किलोमीटर लंबे मार्ग से होकर गुजर रही है और इसमें देशभर से आए लोगों के अलावा कई वरिष्ठ धार्मिक एवं राजनीतिक नेता भी शामिल हैं।

चार महीने बाद हो रहा अंतिम संस्कार

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अली खामेनेई का निधन 28 फरवरी 2026 को हुआ था। क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा परिस्थितियों के कारण उनका अंतिम संस्कार तत्काल नहीं हो सका। चार महीने बाद अब सुरक्षा व्यवस्था के बीच अंतिम यात्रा और दफन की प्रक्रिया शुरू की गई है।

कई धार्मिक शहरों से होकर गुजरेगा काफिला

जानकारी के अनुसार अंतिम यात्रा के बाद पार्थिव शरीर को ईरान के प्रमुख धार्मिक शहरों क़ोम और मशहद ले जाया जाएगा। इसके अलावा इराक के पवित्र शहर नजफ और करबला में भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। अंतिम संस्कार 9 जुलाई को मशहद स्थित इमाम रज़ा दरगाह परिसर में किए जाने की संभावना है।

भारत-ईरान संबंधों पर बढ़ी निगाहें

खामेनेई के निधन के बाद पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों पर भारत भी करीबी नजर बनाए हुए है। भारत और ईरान के बीच चाबहार बंदरगाह, अंतरराष्ट्रीय नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) और व्यापारिक सहयोग जैसे कई रणनीतिक प्रोजेक्ट जुड़े हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के नए नेतृत्व और उसकी विदेश नीति का असर भारत-ईरान संबंधों पर भी पड़ सकता है। भारत की प्राथमिकता क्षेत्र में शांति बनाए रखने के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों को सुरक्षित रखना होगी।

चाबहार परियोजना बनी रहेगी अहम

भारत के लिए ईरान का चाबहार बंदरगाह अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। इसके अलावा ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक संपर्कों के लिहाज से भी ईरान भारत का एक अहम साझेदार रहा है।

क्षेत्रीय हालात पर नजर

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत लगातार कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की नीति पर चल रहा है। सरकार की कोशिश है कि क्षेत्र में शांति बनी रहे और भारतीय नागरिकों एवं राष्ट्रीय हितों पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।