पटना: बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के रिश्तों में उतार-चढ़ाव की लंबी कहानी रही है। साल 2016 में राजद के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के बयान ने महागठबंधन सरकार के भीतर तनाव बढ़ा दिया था। नाराज नीतीश कुमार ने लालू यादव से दूरी बना ली थी। ऐसे में दशहरा के मौके पर लालू यादव ने फोन कर नीतीश कुमार को विजयादशमी की बधाई दी और रिश्तों में आई खटास दूर करने की कोशिश की। हालांकि, इसके करीब आठ महीने बाद बिहार की राजनीति ने ऐसी करवट ली कि महागठबंधन की सरकार टूट गई।

शहाबुद्दीन के बयान से नाराज हुए थे नीतीश कुमार

10 सितंबर 2016 को मोहम्मद शहाबुद्दीन करीब 11 साल बाद जेल से जमानत पर बाहर आए थे। रिहाई के बाद उन्होंने बयान दिया था कि उनके नेता लालू प्रसाद यादव हैं, नीतीश कुमार नहीं। उन्होंने नीतीश कुमार को परिस्थितियों का मुख्यमंत्री भी बताया था।

इस बयान को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक और संवैधानिक हैसियत पर सवाल उठाने के रूप में देखा गया। इसके बाद बिहार सरकार ने 16 सितंबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर शहाबुद्दीन की जमानत रद्द करने की मांग की। सिवान के चंदाबाबू ने भी अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

30 सितंबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के जमानत आदेश को रद्द कर दिया। अदालत के निर्देश के बाद शहाबुद्दीन ने सिवान की अदालत में आत्मसमर्पण किया और उन्हें फिर जेल जाना पड़ा। आत्मसमर्पण के दौरान भी उन्होंने नीतीश कुमार को लेकर तीखी राजनीतिक टिप्पणी की थी।

लालू यादव की चुप्पी से बढ़ी थी नाराजगी

शहाबुद्दीन लगातार नीतीश कुमार के खिलाफ बयान दे रहे थे। उस समय राजद और जदयू महागठबंधन सरकार का हिस्सा थे। लालू यादव की ओर से शहाबुद्दीन के बयानों पर सख्त प्रतिक्रिया नहीं आने से राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई थीं।

नीतीश कुमार इस पूरे घटनाक्रम से नाराज बताए जा रहे थे। उन्हें यह भी शिकायत थी कि गठबंधन के सहयोगी दल के नेता मुख्यमंत्री के खिलाफ लगातार बयान दे रहे हैं, लेकिन उन्हें रोकने की कोशिश नहीं हो रही है। इस विवाद ने लालू यादव और नीतीश कुमार के संबंधों में तनाव बढ़ा दिया था।

दशहरा पर फोन कर लालू ने की सुलह की कोशिश

अक्टूबर 2016 में दुर्गा पूजा और दशहरा के दौरान बिहार की राजनीति में भी हलचल जारी थी। इसी बीच विजयादशमी के अवसर पर लालू यादव ने नीतीश कुमार को फोन कर त्योहार की शुभकामनाएं दीं। उस बातचीत को दोनों नेताओं के बीच जमी बर्फ पिघलाने की कोशिश के तौर पर देखा गया।

फोन पर बातचीत के बाद लालू यादव ने मीडिया से कहा था कि नीतीश कुमार से उनका कोई मतभेद नहीं है। हालांकि, जब पत्रकारों ने पूछा कि मुख्यमंत्री आवास पास होने के बावजूद उन्होंने व्यक्तिगत रूप से जाकर बधाई क्यों नहीं दी, तो लालू यादव ने इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

इस घटनाक्रम से यह संकेत जरूर मिला कि लालू यादव रिश्तों में आई दूरी कम करना चाहते थे। लेकिन फोन पर बात हो जाने का मतलब यह नहीं था कि दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद पूरी तरह खत्म हो गए थे।

आठ महीने बाद बदल गई बिहार की राजनीति

2017 में बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव आया। भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने लालू यादव और उनके परिवार पर भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगाए। इसके बाद राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदला।

जुलाई 2017 में नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और राजद के साथ महागठबंधन सरकार टूट गई। इसके बाद उन्होंने भाजपा के समर्थन से फिर सरकार बनाई और बिहार की सत्ता का समीकरण बदल गया।

इस तरह 2016 में दशहरा के मौके पर लालू यादव की ओर से की गई सुलह की कोशिश के बावजूद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी आखिरकार गहरी साबित हुई। बिहार की राजनीति का यह घटनाक्रम बताता है कि त्योहार के मौके पर संवाद की पहल के बावजूद गठबंधन की स्थिरता राजनीतिक परिस्थितियों और आपसी भरोसे पर निर्भर करती है।