जन गण मन क्वीन एलिजाबेथ के सम्मान में लिखा गया था, मुकेश खन्ना के दावे की क्या है सच्चाई, जानिए पूरा फैक्ट चेक
नई दिल्ली: अभिनेता मुकेश खन्ना के राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को लेकर दिए गए बयान के बाद सोशल मीडिया और सार्वजनिक बहस में एक बार फिर पुराना विवाद चर्चा में आ गया है। मुकेश खन्ना ने दावा किया कि ‘जन गण मन’ भारत का राष्ट्रगान नहीं होना चाहिए और इसे क्वीन एलिजाबेथ के सम्मान में लिखा गया था। उन्होंने ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान बनाने की मांग भी की। हालांकि, उपलब्ध ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय के सम्मान में ‘जन गण मन’ लिखे जाने का दावा गलत है। रवींद्रनाथ टैगोर ने ‘जन गण मन’ की रचना 1911 में की थी। इसका मूल पाठ बांग्ला में था और इसे ‘भारतो भाग्यो बिधाता’ शीर्षक से जोड़ा जाता है। इसके पहले अंतरे को बाद में भारत के राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया गया। संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को ‘जन गण मन’ को भारत के राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया था। मुकेश खन्ना के बयान में सबसे बड़ी ऐतिहासिक समस्या तारीखों को लेकर है। क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय का जन्म 1926 में हुआ था, जबकि ‘जन गण मन’ की रचना 1911 में हो चुकी थी। यानी जिस समय यह गीत लिखा गया, उस समय एलिजाबेथ द्वितीय का जन्म भी नहीं हुआ था। इसलिए उनके सम्मान में यह गीत लिखे जाने का दावा ऐतिहासिक रूप से संभव नहीं है। ‘जन गण मन’ को लेकर एक पुराना विवाद यह रहा है कि इसे ब्रिटिश राजा जॉर्ज पंचम के स्वागत में लिखा गया था। दरअसल, दिसंबर 1911 में जॉर्ज पंचम भारत आए थे और इसी दौरान कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में ‘जन गण मन’ गाया गया। कुछ ब्रिटिश और एंग्लो-इंडियन अखबारों में इस गीत को राजा के स्वागत से जोड़कर रिपोर्ट किया गया था। इसी वजह से बाद में यह विवाद पैदा हुआ। लेकिन रवींद्रनाथ टैगोर ने खुद इस व्याख्या को खारिज किया था। किंग जॉर्ज पंचम से जुड़े विवाद के बाद टैगोर ने अपने पत्रों में स्पष्ट किया कि ‘जन गण मन’ किसी ब्रिटिश राजा की प्रशंसा में नहीं लिखा गया था। उन्होंने ‘अधिनायक’ और ‘भारत भाग्य विधाता’ जैसे शब्दों को किसी अंग्रेज शासक के संदर्भ में लिखे जाने की व्याख्या को स्वीकार नहीं किया। टैगोर के अनुसार गीत में उस शाश्वत शक्ति का उल्लेख था जो भारत के लोगों के भाग्य और यात्रा का मार्गदर्शन करती है। दावा: ‘जन गण मन’ क्वीन एलिजाबेथ के सम्मान में लिखा गया था। ‘जन गण मन’ 1911 में लिखा गया था, जबकि क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय का जन्म 1926 में हुआ था। इसलिए इसे उनके सम्मान में लिखा गया बताना तथ्यात्मक रूप से संभव नहीं है। निष्कर्ष: मुकेश खन्ना का क्वीन एलिजाबेथ से जोड़ने वाला दावा उपलब्ध ऐतिहासिक तथ्यों से मेल नहीं खाता। वहीं ‘जन गण मन’ को ब्रिटिश राजा जॉर्ज पंचम के सम्मान में लिखे जाने वाला पुराना दावा भी टैगोर की अपनी सफाई से विवादित और खारिज किया गया है।‘जन गण मन’ कब लिखा गया था?
क्वीन एलिजाबेथ से जुड़ा दावा क्यों गलत है?
फिर किंग जॉर्ज पंचम से विवाद क्यों जुड़ा?
टैगोर ने खुद क्या सफाई दी थी?
फैक्ट चेक: मुकेश खन्ना के दावे में कितनी सच्चाई?
तथ्य: दावा ऐतिहासिक रूप से गलत है।














