अमरनाथ गुफा में 90 प्रतिशत पिघला बाबा बर्फानी का शिवलिंग
श्रीनगर जम्मू कश्मीर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने
वाले बाबा बर्फानी के शिवलिंग का आकार तेजी से घट गया है। सोमवार को सामने आई
तस्वीरों में शिवलिंग की ऊंचाई करीब एक फीट रह गई है। बताया जा रहा है कि कुछ
दिनों पहले तक कई फीट ऊंचा दिखाई देने वाला हिम शिवलिंग अब लगभग 90 प्रतिशत तक पिघल चुका
है। हालांकि
शिवलिंग
के आकार में कमी आने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई है। 3 जुलाई से शुरू हुई 57 दिनों की अमरनाथ
यात्रा के पहले तीन दिनों में ही 56
हजार से अधिक श्रद्धालु बाबा बर्फानी के
दर्शन कर चुके हैं। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 18.6 प्रतिशत
अधिक बताई जा रही है। 23
मई को करीब 7 फीट
था शिवलिंग 23 मई को सीमा सुरक्षा बल (BSF)
द्वारा जारी तस्वीरों में शिवलिंग की
ऊंचाई करीब 7 फीट दिखाई दी थी। वहीं
29 जून
को प्रथम पूजा के दिन भी हिम शिवलिंग की ऊंचाई 5
फीट से अधिक थी। लेकिन बढ़ते तापमान और
मौसम में बदलाव के कारण 6 जुलाई तक इसका आकार घटकर करीब एक फीट रह गया। 4
लाख श्रद्धालुओं ने कराया पंजीकरण इस वर्ष अमरनाथ यात्रा के लिए करीब 4 लाख श्रद्धालुओं ने
पंजीकरण कराया है। यात्रा के लिए श्रद्धालु दो मार्गों का उपयोग कर रहे हैं। पहला
पारंपरिक 48
किलोमीटर लंबा नुनवान पहलगाम मार्ग
है जबकि दूसरा 14
किलोमीटर लंबा बालटाल मार्ग है जो
छोटा होने के बावजूद अधिक कठिन माना जाता है। 57 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा 28 अगस्त
रक्षाबंधन
के दिन संपन्न होगी। 9
जुलाई तक सभी रजिस्ट्रेशन स्लॉट फुल जम्मू कश्मीर प्रशासन ने बिना पंजीकरण अमरनाथ पहुंचने वाले
श्रद्धालुओं से फिलहाल यात्रा स्थगित करने की अपील की है। प्रशासन के अनुसार 9
जुलाई तक के सभी रजिस्ट्रेशन स्लॉट पूरी
तरह भर चुके हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बिना पंजीकरण वाले
श्रद्धालुओं को बालटाल और पहलगाम मार्ग के चेक प्वाइंट्स पर रोक दिया जाएगा और
उन्हें 9 जुलाई के बाद ही आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी। प्राकृतिक
रूप से बनता है बाबा बर्फानी का शिवलिंग अमरनाथ गुफा में बनने वाला हिम शिवलिंग
किसी बर्फ के टुकड़े को तराशकर नहीं बनाया जाता,
बल्कि यह पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया
से तैयार होता है। गुफा की छत से टपकने वाली पानी की बूंदें अत्यधिक ठंड के कारण
जमती जाती हैं और धीरे धीरे बर्फ का शिवलिंग बन जाता है। इसका आकार हर वर्ष मौसम,
तापमान और पानी की उपलब्धता के अनुसार
बदलता रहता है। यही कारण है कि किसी वर्ष शिवलिंग का आकार बड़ा होता है तो किसी
वर्ष छोटा। क्या
शिवलिंग पिघलने से यात्रा पर असर पड़ेगा फिलहाल प्रशासन या श्री अमरनाथजी श्राइन
बोर्ड की ओर से यात्रा रोकने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। यात्रा
पहले की तरह जारी है और श्रद्धालु लगातार बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंच रहे
हैं। आस्था और श्रद्धा के इस महापर्व में शिवलिंग का आकार भले ही
छोटा हो गया हो लेकिन
श्रद्धालुओं का उत्साह और विश्वास पहले की तरह अटूट बना हुआ है।















