नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को लेकर सवाल उठाए हैं। गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में दुबे ने दावा किया कि राहुल गांधी पिछले 10 वर्षों में कम से कम 270 बार विदेश गए। उन्होंने अमेरिकी सांसद इल्हान उमर और रो खन्ना के साथ राहुल गांधी की मुलाकातों का भी जिक्र किया और इन संपर्कों को लेकर सवाल खड़े किए।

दुबे ने दिल्ली में हाल के विरोध प्रदर्शनों पर भी निशाना साधा। उनका आरोप था कि इन प्रदर्शनों के कारण आम लोगों, कारोबारियों और सड़क पर काम करने वाले लोगों को परेशानी हुई। हालांकि, राहुल गांधी की विदेश यात्राओं की संख्या और अमेरिकी सांसदों से मुलाकातों के पीछे के उद्देश्य को लेकर दुबे के दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

‘10 साल में 270 बार विदेश गए राहुल गांधी’

निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं की संख्या पर सवाल उठाते हुए कहा, “विपक्ष के नेता पिछले दस साल, राहुल गांधी जी, वो कम से कम 270 बार विदेश गए हैं। एक-दो बार नहीं, 270 बार।”

BJP सांसद ने सवाल किया कि राहुल गांधी इतनी बार विदेश क्यों जाते हैं और विदेश में किन लोगों से मुलाकात करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी विरोध प्रदर्शनों के दौरान युवाओं को आंदोलित करते हैं, जबकि बाद में प्रदर्शन से जुड़े लोगों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।

दुबे ने अपने बयान में आशुतोष रांका और सौरभ दास का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन से जुड़े लोग जेल में थे, जबकि राहुल गांधी विदेश चले गए। इन टिप्पणियों पर कांग्रेस या राहुल गांधी की प्रतिक्रिया इस खबर के लिए उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।

दिल्ली के प्रदर्शनों से आम लोगों को परेशानी का आरोप

निशिकांत दुबे ने दिल्ली में पिछले 10 से 15 दिनों के दौरान हुए प्रदर्शनों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों के कारण ऐसा माहौल बन गया था, मानो नियम-कानून लागू नहीं हों।

दुबे के मुताबिक, प्रदर्शनों से आम नागरिकों के अलावा व्यापारियों, ऑटो और टेंपो चालकों, रिक्शा चालकों तथा रेहड़ी-पटरी वालों को परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी कुछ समय के लिए लंच या डिनर पर चले जाते थे, जबकि प्रदर्शनकारी सड़कों पर विरोध करते रहते थे।

BJP सांसद ने विरोध प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि तिरंगा देश और संविधान का प्रतीक है और उसके इस्तेमाल में निर्धारित नियमों तथा उसकी गरिमा का ध्यान रखा जाना चाहिए।

इल्हान उमर और रो खन्ना से मुलाकात पर सवाल

दुबे ने राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा के दौरान अमेरिकी सांसदों इल्हान उमर और रो खन्ना से हुई मुलाकातों का भी जिक्र किया। उन्होंने इन संपर्कों को जॉर्ज सोरोस से जुड़े फाउंडेशन के संदर्भ में उठाते हुए सवाल किया कि इन मुलाकातों का उद्देश्य क्या था।

सितंबर 2024 में राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा के दौरान अमेरिकी सांसदों के एक समूह के साथ उनकी मुलाकात हुई थी। इस समूह में इल्हान उमर और रो खन्ना भी शामिल थे। हालांकि, किसी से मुलाकात होना अपने आप में किसी अनुचित संबंध या गतिविधि का प्रमाण नहीं है। दुबे ने अपने बयान में जो आरोप लगाए, उनके समर्थन में स्वतंत्र प्रमाण उपलब्ध कराना आवश्यक होगा।

इल्हान उमर की पाकिस्तान यात्रा का भी किया उल्लेख

निशिकांत दुबे ने अमेरिकी सांसद इल्हान उमर की अप्रैल 2022 में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) की यात्रा का भी उल्लेख किया। उन्होंने उमर के कश्मीर संबंधी रुख और भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर दिए गए उनके बयानों की आलोचना की।

दुबे ने आरोप लगाया कि उमर ने पाकिस्तान यात्रा के दौरान कश्मीर को लेकर भारत विरोधी टिप्पणियां की थीं। उन्होंने अमेरिकी सांसद और उनके परिवार से जुड़े कथित मामलों का भी जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिकी प्रशासन और FBI की कार्रवाई से जुड़े सवाल उठ रहे हैं।

हालांकि, इल्हान उमर को लेकर दुबे के नागरिकता संबंधी आरोपों, संभावित गिरफ्तारी या निर्वासन की आशंका की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर के लिए उपलब्ध जानकारी में नहीं है। ऐसे दावों को आधिकारिक रिकॉर्ड या विश्वसनीय रिपोर्टिंग से सत्यापित किए बिना तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

विदेश यात्राओं और राजनीतिक संपर्कों पर सियासी बहस

निशिकांत दुबे के बयान ने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं, अमेरिकी सांसदों से उनके संपर्क और दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। BJP सांसद ने इन मुद्दों के जरिए कांग्रेस नेता पर सवाल उठाए हैं, जबकि उनके आरोपों पर राहुल गांधी और कांग्रेस का पक्ष सामने आने पर खबर को अपडेट किया जाना चाहिए।

राजनीतिक आरोपों और प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। विदेश यात्रा या किसी विदेशी जनप्रतिनिधि से मुलाकात अपने आप में गलत गतिविधि का प्रमाण नहीं होती।