बोकारो: चंदनकियारी की लाइफलाइन मानी जाने वाली NH-218 के निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। सीतानाला से चंदनकियारी के दुबेकाटा मोड़ होते हुए पश्चिम बंगाल सीमा तक सड़क चौड़ीकरण, सुदृढ़ीकरण और नाली निर्माण में कथित अनियमितताओं को लेकर जिला 20 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति के उपाध्यक्ष देवाशिष मंडल ने बोकारो के उपायुक्त से शिकायत की है। उन्होंने जिला स्तरीय तकनीकी जांच टीम गठित कर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की मांग की है।

मंडल ने 23 अक्टूबर 2026 को पत्रांक B-126/26 के माध्यम से उपायुक्त को पत्र सौंपकर निर्माण कार्य में प्राक्कलन के कथित उल्लंघन का मामला उठाया है। यह काम राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, धनबाद के कार्यपालक अभियंता की देखरेख में कराया जा रहा है।

प्राक्कलन के अनुसार काम नहीं होने का आरोप

देवाशिष मंडल ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि सड़क चौड़ीकरण, सुदृढ़ीकरण और नाली निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य की निगरानी में भी लापरवाही बरती जा रही है और संबंधित विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी निर्माण स्थल पर नियमित रूप से नहीं रहती।

स्थानीय लोगों की ओर से भी सड़क और नाली निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए जाने की बात कही गई है। शिकायत के मुताबिक, कुछ स्थानों पर नाली की गहराई कम है, जबकि कहीं सड़क की चौड़ाई निर्धारित मानकों से कम होने का आरोप है। कुछ जगहों पर नवनिर्मित नालियों के बारिश में क्षतिग्रस्त होने की भी बात सामने आई है।

नाली निर्माण से लेकर सड़क की गुणवत्ता पर सवाल

शिकायत में निर्माण सामग्री के इस्तेमाल और सीमेंट-गिट्टी के अनुपात की भी जांच कराने की मांग की गई है। आरोप है कि गुणवत्ता की अनदेखी के कारण करोड़ों रुपये की लागत से बन रही सड़क के कुछ हिस्सों में समय से पहले ही खराबी आने लगी है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र तकनीकी जांच और संबंधित विभाग का पक्ष सामने आने के बाद ही निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

NH-218 पर जाम और दुर्घटनाओं का भी खतरा

NH-218 चंदनकियारी को बोकारो-धनबाद और पश्चिम बंगाल के पुरुलिया क्षेत्र से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। इस सड़क से प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही होती है। ऐसे में निर्माण कार्य के दौरान यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

मंडल की शिकायत के अनुसार, निर्माण स्थल पर पर्याप्त डायवर्जन और सुरक्षा इंतजाम नहीं होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जाम और दुर्घटनाओं की आशंका के बीच निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली की जांच जरूरी बताई गई है।

अधिकारियों और ठेकेदार की भूमिका की जांच की मांग

देवाशिष मंडल ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य की समुचित निगरानी नहीं होने से ठेकेदार को मनमाने तरीके से काम करने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों की भूमिका, निर्माण की गुणवत्ता और भुगतान से संबंधित प्रक्रिया की भी जांच कराने की मांग की है।

उनका कहना है कि यदि समय रहते कमियों को दूर नहीं किया गया, तो सड़क जल्द क्षतिग्रस्त हो सकती है। ऐसी स्थिति में मरम्मत पर दोबारा सरकारी राशि खर्च करनी पड़ सकती है।

उपायुक्त की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

जिला 20 सूत्री उपाध्यक्ष ने उपायुक्त से जिला स्तरीय तकनीकी टीम गठित कर सड़क की चौड़ाई, नाली की गहराई, निर्माण सामग्री और प्राक्कलन के अनुरूप हुए कार्य की जांच कराने का आग्रह किया है। साथ ही, जांच में अनियमितता की पुष्टि होने पर संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

अब इस शिकायत पर जिला प्रशासन और राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी। फिलहाल, निर्माण कार्य में गड़बड़ी से जुड़े आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।