LIC के 70 साल पूरे, बीमा कर्मचारी संघ ने उपलब्धियां गिनाईं और निजीकरण की चुनौतियों पर जताई चिंता
हजारीबाग: भारतीय
जीवन बीमा निगम (LIC) ने
मंगलवार को अपनी स्थापना के 70 वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर LIC
के मंडल कार्यालय में बीमा कर्मचारी संघ
की ओर से प्रेस वार्ता आयोजित की गई। संघ के महामंत्री जगदीश चंद्र मित्तल ने LIC की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा
कि वर्ष 1956 में
स्थापित निगम आज देश की वित्तीय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुका
है।उन्होंने बताया कि LIC की
कुल संपत्ति 59.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। मार्च 1995
में 53,480 करोड़ रुपये का निवेश पोर्टफोलियो बढ़कर
मार्च 2026 तक 51.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। संघ के अनुसार, LIC ने बुनियादी ढांचे, आवास, सिंचाई और सड़क जैसे क्षेत्रों में करीब 40 लाख करोड़ रुपये का योगदान किया है। पिछले सात दशकों में
केंद्र सरकार को लाभांश के रूप में 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक दिए गए हैं। प्रेस वार्ता में
बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में LIC की कुल प्रीमियम आय 5,35,984 करोड़ रुपये और कुल आय 9,72,914 करोड़ रुपये रही। प्रथम वर्ष के
प्रीमियम में LIC की
बाजार हिस्सेदारी 56.66 प्रतिशत,
जबकि कुल पॉलिसियों में हिस्सेदारी 65.16
प्रतिशत बताई गई।इस अवधि में LIC
ने 67,676
करोड़ रुपये का नया
व्यवसाय प्रीमियम हासिल किया और 1.84 करोड़ से अधिक व्यक्तिगत पॉलिसियां
बेचीं। इनमें 44.26 प्रतिशत
पॉलिसियां मिलेनियल्स द्वारा खरीदे जाने की बात कही गई। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों से
48.05 प्रतिशत नया व्यवसाय
प्रीमियम प्राप्त होने का दावा किया गया।पॉलिसीधारकों के लिए
59,726 करोड़
रुपये का रिकॉर्ड बोनस घोषित किया गया। वहीं 253.91 लाख दावों के भुगतान में 3,12,771 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की
गई। मृत्यु दावा निपटान अनुपात करीब 99.5 प्रतिशत बताया गया।संघ के अनुसार, LIC का सॉल्वेंसी रेशियो 2.35 गुना है, जो 1.50 गुना की नियामकीय सीमा से अधिक है। महामंत्री जगदीश
चंद्र मित्तल ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े नियामकीय बदलावों को लेकर
चिंता जताई। उन्होंने कहा कि LIC की 98.42 प्रतिशत पॉलिसियां और 91.75 प्रतिशत नया व्यवसाय प्रीमियम व्यक्तिगत
एजेंटों के माध्यम से हासिल होता है।उन्होंने कहा कि वितरण व्यवस्था
में होने वाले किसी भी बड़े बदलाव का सीधा असर LIC के कारोबार और एजेंटों पर पड़ सकता है।
कर्मचारी संगठन ने सार्वजनिक क्षेत्र और LIC को कमजोर करने वाली किसी भी कोशिश का
विरोध करने की बात कही।संघ की ओर से एजेंटों और पॉलिसीधारकों के बीच जागरूकता
अभियान चलाने तथा LIC को
मजबूत बनाए रखने के लिए व्यापक समर्थन जुटाने की बात भी कही गई। बीमा कर्मचारी संघ ने ‘लोगों का पैसा, लोगों की भलाई के लिए’ के संकल्प के साथ LIC की सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका को बनाए
रखने पर जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि LIC को बचाने और सार्वजनिक बीमा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए
व्यापक देशव्यापी वर्किंग क्लास आंदोलन
की जरूरत है।प्रेस
वार्ता में संयुक्त सचिव शंकर कुमार, सांगठनिक सचिव मदन कुमार पाठक, सुशील लकड़ा, सहायक सचिव दुर्गा सिंह, कोषाध्यक्ष विजय कुमार चौबे, सह कोषाध्यक्ष सुदर्शन सिंह सहित अख्तर हुसैन,
बसंत कुमार, बिरसा मुंडा, राजेंद्र प्रसाद, प्रवीर राणा, निरंजन यादव, रविंद्र कुमार, अजय रविदास, रौनक भूषण और सौरभ शंकर मौजूद रहे।2025-26 में
भी कई रिकॉर्ड
IRDAI के
बदलावों पर जताई चिंता
देशव्यापी वर्किंग क्लास आंदोलन की मांग















