मुंबई: मुंबई में फिल्मी हस्तियों और चर्चित लोगों से जुड़े सनसनीखेज मामलों की जांच कर रही पुलिस के सामने एक बड़ी कानूनी अड़चन है। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का नाम टाइगर श्रॉफ के घर के बाहर हुई फायरिंग, सलमान खान को मिली धमकियों और बाबा सिद्दीकी हत्याकांड जैसे मामलों से जोड़ा गया है। इसके बावजूद मुंबई पुलिस के लिए उसे साबरमती जेल से बाहर लाकर पूछताछ करना आसान नहीं है। इसकी वजह सिर्फ जेल की सुरक्षा नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के आदेश से जुड़ी कानूनी पाबंदी भी है।

एक आदेश, जिसने सीमित कर दिए पुलिस के विकल्प

लॉरेंस बिश्नोई गुजरात की साबरमती जेल में बंद है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के तहत उस पर जेल से बाहर ले जाने को लेकर प्रतिबंध लागू है। इस व्यवस्था के कारण मुंबई पुलिस उसे अपनी हिरासत में लेकर दूसरे शहर में पूछताछ के लिए नहीं ले जा सकती, जब तक संबंधित पाबंदी हटाने या उसमें राहत देने की कानूनी प्रक्रिया पूरी न हो।

इसका सीधा असर उन मामलों की जांच पर पड़ सकता है, जिनमें पुलिस बिश्नोई गिरोह की भूमिका, कथित साजिश और अपराधों के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल करना चाहती है।

टाइगर श्रॉफ से लेकर सलमान खान तक, कई मामलों में नाम चर्चा में

लॉरेंस बिश्नोई गिरोह का नाम मुंबई में हुई कई चर्चित घटनाओं के सिलसिले में सामने आता रहा है। इनमें अभिनेता टाइगर श्रॉफ के आवास के बाहर फायरिंग की घटना, अभिनेता सलमान खान को दी गई धमकियां और उनके घर के बाहर हुई गोलीबारी से जुड़ा मामला शामिल है। इसके अलावा एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या की जांच के दौरान भी बिश्नोई गिरोह का नाम चर्चा में रहा।

हालांकि, किसी मामले में गिरोह का नाम सामने आना और किसी व्यक्ति की भूमिका अदालत में साबित होना अलग-अलग बातें हैं। इन घटनाओं में बिश्नोई की कथित भूमिका को लेकर पुलिस की जांच और संबंधित मामलों के आधिकारिक रिकॉर्ड ही निर्णायक होंगे।

कानून के कारण जेल से बाहर लाना मुश्किल

इस मामले में पहले दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 268 के तहत लागू प्रतिबंध का उल्लेख किया जाता रहा है। इस प्रावधान के जरिए कुछ कैदियों को जेल से बाहर ले जाने पर रोक लगाई जा सकती है। नए आपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) में भी इससे संबंधित प्रावधान मौजूद हैं।

ऐसी पाबंदी लागू रहने पर किसी दूसरी राज्य की पुलिस के लिए आरोपी को जेल से बाहर ले जाकर पूछताछ करना कानूनी रूप से जटिल हो जाता है। इसलिए मुंबई पुलिस को जांच आगे बढ़ाने के लिए उपलब्ध कानूनी रास्तों का सहारा लेना पड़ सकता है।

क्या जेल में ही हो सकती है पूछताछ?

जेल से बाहर ले जाने पर रोक का मतलब यह नहीं है कि जांच एजेंसियों के सभी विकल्प खत्म हो गए हैं। नियमों और सक्षम अधिकारियों की अनुमति के अधीन पुलिस जेल परिसर में पूछताछ करने का रास्ता अपना सकती है। जरूरत पड़ने पर संबंधित प्रतिबंध में राहत पाने के लिए भी कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

इस तरह जांच की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि पुलिस को पूछताछ के लिए कौन-सी अनुमति मिलती है और संबंधित आदेश में बदलाव की कोई गुंजाइश है या नहीं।

अनमोल बिश्नोई का मामला भी जांच के दायरे में

बिश्नोई गिरोह से जुड़े मामलों में अनमोल बिश्नोई का नाम भी सामने आता रहा है। हालांकि, लॉरेंस और अनमोल से जुड़े मामलों की कानूनी स्थिति और जांच की परिस्थितियों को अलग-अलग देखना जरूरी है। किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने, पूछताछ करने या दूसरे स्थान पर ले जाने की प्रक्रिया संबंधित आदेशों और अदालत के निर्देशों के अनुसार ही तय होती है।

फिलहाल, लॉरेंस बिश्नोई से मुंबई पुलिस की पूछताछ का सवाल केवल जांच की जरूरत तक सीमित नहीं है। इसमें जेल सुरक्षा, केंद्र सरकार के आदेश और लागू कानूनी प्रावधानों की भूमिका भी अहम है।