रांची: झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती और परीक्षा मामलों को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। झारखंड हाईकोर्ट में राज्य सरकार की ओर से CID जांच की स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश किए जाने के बाद नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार से कई सवाल पूछे हैं। उन्होंने पूछा कि जांच रिपोर्ट को बंद लिफाफे में पेश करने की जरूरत क्यों पड़ी और सरकार पारदर्शिता से क्यों बच रही है।

15 सितंबर को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार ने CID जांच की प्रगति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत के सामने रखी थी। अदालत ने रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद उसे दोबारा सील कर रिकॉर्ड पर रख दिया। हाईकोर्ट ने सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 48 घंटे का समय दिया है और मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को निर्धारित की है।

'बंद लिफाफे में रिपोर्ट क्यों?'

बाबूलाल मरांडी ने CID की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि रिपोर्ट चार सप्ताह बाद सामने आई और अब उसे भी बंद लिफाफे में रखा जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार के पास ऐसी कोई जानकारी है, जिसे वह सार्वजनिक नहीं करना चाहती।

मरांडी ने यह भी सवाल उठाया कि JPSC-JSSC से जुड़ी 22 परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले के पीछे क्या तथ्य हैं और इनकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही। उनके ये बयान सरकार की जांच प्रक्रिया पर राजनीतिक सवाल के रूप में सामने आए हैं।

परीक्षा में गड़बड़ी और छात्रों के भविष्य पर उठाए सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मामला केवल परीक्षाओं को रद्द करने तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कथित गड़बड़ी कैसे हुई, इसके लिए कौन जिम्मेदार है और उन अभ्यर्थियों का क्या होगा, जिन्होंने इन परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों लगाए हैं।

वहीं, हाईकोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान CID जांच की रफ्तार को लेकर चिंता जताई है। अदालत के मुताबिक, शुरुआती दौर में जांच की गति तेज थी, लेकिन बाद में इसमें कमी दिखाई दी। कोर्ट ने कहा कि मामला 2,500 से अधिक अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा है।

JSSC-CGL मामले का भी किया जिक्र

बाबूलाल मरांडी ने अपने बयान में JSSC-CGL मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने पिछली CID जांच को लेकर सवाल उठाते हुए दावा किया कि परीक्षा से पहले नेपाल, बिहार और पश्चिम बंगाल में प्रश्नों के लीक होने की जानकारी सामने आई थी।

इन दावों को मरांडी ने अपनी ओर से जांच की पारदर्शिता से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित जांच एजेंसी और सरकार का आधिकारिक पक्ष अलग हो सकता है और जांच के निष्कर्ष के आधार पर ही तथ्यों की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

CBI जांच की मांग दोहराई

बाबूलाल मरांडी ने JPSC-JSSC मामलों की CBI जांच की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि युवाओं को पूरे मामले की स्पष्ट जानकारी और न्याय मिलना चाहिए।

इस बीच हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई जारी है। अदालत ने सरकार को 48 घंटे में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और 18 सितंबर को अगली सुनवाई तय की है। अदालत ने JSSC-CGL समेत संबंधित नियुक्तियों को रद्द करने के सरकारी फैसले पर पहले दी गई अंतरिम राहत को भी अगले आदेश तक जारी रखा है।