रांची: झारखंड में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लोगों के खिलाफ अत्याचार और उत्पीड़न के मामलों में कार्रवाई में देरी को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया है कि SC-ST अत्याचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों में जांच पूरी कर निर्धारित समयसीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल की जाए।

झारखंड सरकार के गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में लंबित मामलों और पीड़ितों को मिलने वाली मुआवजा राशि की स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में सामने आए आंकड़ों के बाद पुलिस अधिकारियों और सभी जिलों के उपायुक्तों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

603 SC और 484 ST मामले लंबित

बैठक में आईजी सीआईडी, झारखंड की ओर से पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 से जून 2026 तक दर्ज SC Act से जुड़े मामलों में से जून 2026 के अंत तक 603 मामले लंबित पाए गए।

वहीं, ST से जुड़े मामलों की श्रेणी में 484 मामले जांच के स्तर पर लंबित बताए गए हैं। सरकार ने लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने और जांच प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

60 दिनों के भीतर दाखिल करनी होगी चार्जशीट

समीक्षा बैठक में पुलिस को निर्देश दिया गया कि SC-ST एक्ट के तहत दर्ज मामलों में 60 दिनों के भीतर चार्जशीट न्यायालय में दाखिल करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। जिन मामलों में जांच 60 दिनों से अधिक समय से लंबित है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर लेकर जल्द से जल्द जांच पूरी करने को कहा गया है। सरकार का जोर जांच प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ-साथ पुलिस की जवाबदेही सुनिश्चित करने पर है।

मुआवजा भुगतान में देरी पर भी सरकार सख्त

बैठक में SC-ST अत्याचार मामलों के पीड़ितों को मिलने वाली कानूनी मुआवजा राशि के भुगतान की स्थिति पर भी चर्चा हुई। समीक्षा में यह बात सामने आई कि कुछ जिलों में पात्र पीड़ितों को मुआवजा राशि का भुगतान लंबित है।

इस पर अपर मुख्य सचिव ने सभी जिलों के डीसी से मुआवजा भुगतान की अपडेटेड रिपोर्ट मांगी है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि नियमानुसार पात्र पीड़ितों को आर्थिक सहायता का भुगतान जल्द सुनिश्चित किया जाए।

सजा और रिहाई के आंकड़ों का भी होगा विश्लेषण

सरकार की ओर से वर्ष 2024 से मई 2026 के बीच अदालतों द्वारा SC-ST मामलों में दी गई सजा और रिहाई से संबंधित आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण करने का निर्णय लिया गया है। इससे मामलों की जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया की स्थिति की समीक्षा करने में मदद मिलेगी।

अगली बैठक में मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट

बैठक में तय किया गया कि अगली समीक्षा बैठक में निदेशक, अभियोजन निदेशालय पीड़ितों को दिए जाने वाले मुआवजे से संबंधित अपडेटेड रिपोर्ट के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होंगे। इसके अलावा राज्य के सभी डीसी से जिलेवार मुआवजा वितरण की रिपोर्ट भी मांगी गई है। सरकार ने लंबित मामलों और मुआवजा भुगतान की स्थिति पर नियमित निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।

सरकार के प्रमुख निर्देश

  • SC-ST एक्ट के मामलों में 60 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
  • 60 दिनों से अधिक समय से लंबित जांच को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।
  • पात्र पीड़ितों को नियमानुसार मुआवजा राशि का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
  • सभी जिलों से मुआवजा भुगतान की जिलेवार रिपोर्ट मांगी गई है।
  • वर्ष 2024 से मई 2026 तक अदालतों में हुई सजा और रिहाई के आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा।
  • अगली समीक्षा बैठक में अभियोजन निदेशालय के निदेशक को अपडेटेड रिपोर्ट के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।