रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने NTPC के अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की पूरी कार्यवाही रद्द कर दी है। न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की पीठ ने हजारीबाग के न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) द्वारा 13 नवंबर 2025 को पारित संज्ञान आदेश के साथ शिकायत वाद संख्या 1834/2024 से जुड़ी पूरी आपराधिक कार्यवाही को खारिज कर दिया।

यह मामला NTPC के अधिकारी नीरज जलोटा, कमलराम रजक, पंकज ध्यानी और संजीत कुमार सेनापति से जुड़ा था। अधिकारियों की ओर से हाईकोर्ट में अधिवक्ता कुमार हर्ष ने पक्ष रखा।

शिकायतकर्ता ने अधिकारियों पर लगाए थे गंभीर आरोप

मामले के शिकायतकर्ता हजारीबाग निवासी मोहम्मद सजाद आलम ने आरोप लगाया था कि उन्हें NTPC में कंप्यूटर प्रशिक्षण देने के लिए नियुक्त किया गया था। शिकायत के मुताबिक, उन्हें अनुबंध के अनुसार काम नहीं दिया गया और भुगतान भी नहीं किया गया।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया था कि 25 मई 2024 को NTPC के अधिकारी उसके घर पहुंचे और उसके साथ मारपीट की। इसके अलावा झूठे मामले में फंसाने और जेल भेजने की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया था।

इन आरोपों के आधार पर निचली अदालत ने मामले में संज्ञान लिया था।

हाईकोर्ट ने कहा- चोट का कोई उल्लेख नहीं

अधिकारियों की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध तथ्यों की जांच की। अदालत ने पाया कि शिकायत में किसी तरह की शारीरिक चोट या दर्द होने का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। कोर्ट ने कहा कि केवल मारपीट का सामान्य आरोप, बिना किसी चोट या दर्द के उल्लेख के, भारतीय दंड संहिता की धारा 323 के तहत अपराध गठित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसी तरह धारा 504 से जुड़े आरोपों पर भी अदालत ने कहा कि केवल अपमान का आरोप अपने आप में पर्याप्त नहीं है। इसके लिए ऐसा उकसावा होना जरूरी है जिससे लोक शांति भंग होने की स्थिति पैदा हो।

कोर्ट में शिकायतकर्ता ने स्वीकार की नौकरी की इच्छा

सुनवाई के दौरान अदालत ने शिकायतकर्ता से उसके उद्देश्य को लेकर सवाल किया। कोर्ट के समक्ष शिकायतकर्ता ने स्वीकार किया कि वह NTPC में नौकरी पाना चाहता था। हाईकोर्ट ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए माना कि शिकायत के जरिए अधिकारियों पर दबाव बनाने और नौकरी हासिल करने की कोशिश की गई थी। अदालत ने यह भी माना कि मामला बदले की भावना से दर्ज कराए जाने की स्थिति में आपराधिक कानून की प्रक्रिया का इस्तेमाल करने जैसा प्रतीत होता है।

हाईकोर्ट ने पूरी आपराधिक कार्यवाही की रद्द

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों को सही भी मान लिया जाए, तब भी संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक अपराध का गठन नहीं होता। ऐसी परिस्थितियों में आपराधिक कार्यवाही को आगे बढ़ाना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत के संज्ञान आदेश समेत शिकायत वाद से जुड़ी पूरी कार्यवाही को रद्द कर दिया। इस फैसले के बाद NTPC के अधिकारियों को बड़ी कानूनी राहत मिली है।

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