रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने छह वर्षीय बच्ची से जुड़े यौन उत्पीड़न के मामले में उम्रकैद की सजा पाए सुशील एक्का को जमानत दे दी है। अदालत ने आरोपी की अपील लंबित रहने तक जमानत याचिका स्वीकार करते हुए निर्धारित शर्तों पर रिहा करने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयानों सहित उपलब्ध परिस्थितियों पर विचार किया।

अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपी को 10 हजार रुपये के जमानत बांड और समान राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने पर रिहा किया जाए। यह मामला डोरंडा थाना कांड संख्या 145/2025 और विशेष पॉक्सो केस संख्या 106/2025 से संबंधित है।

क्या है पूरा मामला?

मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता महिला 3 मई 2025 को काम से घर लौटी थी। इसके बाद वह आरोपी के घर गई, जहां उसकी छह वर्षीय बेटी और मकान मालिक सुशील एक्का को कथित तौर पर बिस्तर पर निर्वस्त्र अवस्था में पाया। महिला ने जब आरोपी के परिवार के सदस्यों से इसकी शिकायत की, तो उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट का प्रयास किए जाने का भी आरोप लगाया गया।

इस मामले में निचली अदालत ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(2)(एफ) और 65(2) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत दोषी ठहराया था। उसे पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत प्राकृतिक जीवन के शेष समय तक आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी।

बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?

जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से अधिवक्ता शादाब इकबाल ने दलील दी कि मेडिकल रिपोर्ट में पीड़िता के साथ यौन उत्पीड़न की पुष्टि नहीं होती है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने अपनी गवाही में घटना के दिन आरोपी के साथ विवाद होने की बात स्वीकार की थी।

अधिवक्ता ने दलील दी कि विवाद के बाद शिकायतकर्ता ने पुलिस की मदद से आरोपी के घर से अपना सामान हटाया था। बचाव पक्ष के अनुसार, कथित घटना 3 मई 2025 को हुई, जबकि प्राथमिकी 5 मई 2025 को दर्ज कराई गई। इस आधार पर प्राथमिकी को दोनों के बीच हुए विवाद का प्रतिशोध बताते हुए जमानत देने की मांग की गई।

आरोपी 6 मई 2025 से जेल में बंद था।

गवाहों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट पर अदालत का विचार

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जमानत याचिका का विरोध किया। हालांकि, खंडपीठ ने शिकायतकर्ता और उसकी बहन के बयानों में 3 मई को हुए विवाद के उल्लेख तथा मेडिकल रिपोर्ट पर विचार किया। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने अपील के लंबित रहने तक आरोपी को जमानत देने का आदेश दिया।