रांची:  झारखंड सरकार में HRMS पोर्टल खोलने को लेकर वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर और कार्मिक सचिव प्रवीण टोप्पो के बीच मतभेद सामने आया है। वित्त मंत्री ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कार्मिक सचिव के रवैये पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि शासन-प्रशासन संवेदनशीलता से चलता है, हठधर्मिता से नहीं। मंत्री ने मुख्य सचिव से पूरे मामले की समीक्षा कर यह देखने का आग्रह किया है कि HRMS पोर्टल खोलने से प्रशासनिक स्तर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा या नहीं। यदि ऐसा कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, तो पोर्टल खोलने का आदेश देने की बात कही है।

300 पुलिसकर्मियों की संपत्ति का ब्योरा जमा करने का मामला

मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने 14 अक्टूबर को मुख्य सचिव को पत्र लिखा था। पत्र के मुताबिक, झारखंड पुलिस के करीब 300 जवान समय पर अपनी संपत्ति का ब्योरा HRMS पोर्टल पर जमा नहीं कर पाए थे। इन पुलिसकर्मियों को संपत्ति का विवरण जमा करने का एक और अवसर देने के लिए मंत्री ने कार्मिक सचिव से बात की थी।

मंत्री ने कार्मिक सचिव को अपने कार्यालय में बुलाकर पोर्टल दोबारा खोलने के मुद्दे पर चर्चा की थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि यदि कोई सरकारी पदाधिकारी अपनी संपत्ति का ब्योरा पोर्टल पर जमा करना चाहता है, तो इसमें वैधानिक कठिनाई क्या है?

कार्मिक सचिव के जवाब से नाराज हुए मंत्री

पत्र में उल्लेख है कि कार्मिक सचिव प्रवीण टोप्पो ने कहा था कि वर्ष के बीच में HRMS पोर्टल खोलने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने यह भी तर्क दिया था कि यदि बीच में पोर्टल खोला गया, तो पदाधिकारियों की ऐसी आदत बन जाएगी और फिर सालभर पोर्टल खुला रखना पड़ेगा।

मंत्री के अनुसार, जब उन्होंने पूछा कि यदि पोर्टल सालभर खुला रहे तो इससे प्रशासनिक स्तर पर क्या नुकसान होगा, तब कार्मिक सचिव ने कथित तौर पर पोर्टल नहीं खोलने की बात कही।

इसी रवैये पर आपत्ति जताते हुए मंत्री ने मुख्य सचिव से मामले की समीक्षा करने और प्रशासनिक हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने का आग्रह किया है।

समय पर ब्योरा नहीं देने से प्रोन्नति पर असर की आशंका

जानकारी के अनुसार, राज्य के पुलिसकर्मियों और सरकारी पदाधिकारियों को हर साल जनवरी और फरवरी में ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी संपत्ति का ब्योरा जमा करना होता है। कुछ पुलिसकर्मी अभियान या अन्य जरूरी ड्यूटी में तैनात रहने के कारण निर्धारित समयसीमा में विवरण जमा नहीं कर पाए।

अब संबंधित पुलिसकर्मियों के सामने यह समस्या है कि जनवरी-फरवरी 2027 में पोर्टल खुलने पर वे वर्ष 2026 की संपत्ति का ब्योरा तो जमा कर सकेंगे, लेकिन वर्ष 2025 का विवरण जमा करने का अवसर नहीं मिलने की आशंका है। इससे उनकी प्रोन्नति और एसीपी (Assured Career Progression) के लाभ पर असर पड़ सकता है।

पुलिस एसोसिएशन ने भी उठाया था मुद्दा

पुलिसकर्मियों को संपत्ति का ब्योरा जमा करने का अतिरिक्त अवसर दिलाने के लिए झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने भी विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए थे। खबर के मुताबिक, मंत्री और गृह सचिव की ओर से पहल किए जाने के बावजूद कार्मिक विभाग ने पोर्टल नहीं खोला।