रांची: झारखंड में जनजातीय बहुल क्षेत्रों के विकास के लिए आवंटित करोड़ों रुपये खर्च नहीं हो पा रहे हैं। महालेखाकार की ऑडिट में सामने आया है कि राज्य के छह समेकित जनजाति विकास अभिकरण (ITDA) और गढ़वा के जिला कल्याण पदाधिकारी कार्यालय के पास कुल 218.49 करोड़ रुपये पड़े हुए हैं। यह राशि कल्याण विभाग की ओर से विभिन्न विकास योजनाओं को लागू करने के लिए दी गई थी।

इस मामले ने जनजातीय क्षेत्रों में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और सरकारी राशि के उपयोग को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि राशि कितने समय से खातों में पड़ी है और किन योजनाओं में खर्च नहीं हो सकी है।

राज्य में 15 ITDA कर रहे हैं काम

झारखंड के जनजाति बहुल इलाकों में कुल 15 समेकित जनजाति विकास अभिकरण (ITDA) कार्यरत हैं। पहले इन क्षेत्रों में कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के लिए MESO परियोजना कार्यालय काम करते थे। वर्ष 2009 में सरकार ने इन कार्यालयों को ITDA में बदल दिया। इन्हें सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत पंजीकृत किया गया है।

कल्याण विभाग जनजाति बहुल क्षेत्रों में विकास योजनाओं के संचालन के लिए ITDA को राशि उपलब्ध कराता है। इसका उद्देश्य संबंधित क्षेत्रों में योजनाओं को लागू करना और जनजातीय समुदायों तक विकास का लाभ पहुंचाना है।

किस ITDA के पास कितनी राशि?

महालेखाकार की ऑडिट में सामने आई जानकारी के अनुसार, विभिन्न ITDA और गढ़वा के जिला कल्याण पदाधिकारी कार्यालय के पास करोड़ों रुपये की राशि मौजूद है।

कार्यालयराशि (करोड़ रुपये में)
ITDA खूंटी34.04
ITDA सरायकेला53.71
ITDA चाईबासा10.94
ITDA साहेबगंज33.03
ITDA रांची44.49
ITDA गुमला30.51
गढ़वा जिला कल्याण पदाधिकारी कार्यालय11.76
कुल218.48

उपलब्ध आंकड़ों को जोड़ने पर कुल राशि 218.48 करोड़ रुपये होती है, जबकि रिपोर्ट में कुल 218.49 करोड़ रुपये बताए गए हैं। एक लाख रुपये का यह अंतर संभवतः राउंडिंग या आंकड़ों में अंतर के कारण हो सकता है।

योजनाओं के क्रियान्वयन पर उठे सवाल

जनजातीय बहुल क्षेत्रों में विकास योजनाओं के लिए राशि उपलब्ध होने के बावजूद उसका खर्च नहीं होना महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। यह जानना जरूरी है कि राशि किन योजनाओं के लिए आवंटित की गई थी, उनके क्रियान्वयन में देरी क्यों हुई और संबंधित कार्यालयों ने खर्च को लेकर क्या कदम उठाए हैं।

फिलहाल, उपलब्ध ऑडिट संबंधी जानकारी में राशि के खाते में पड़े रहने के कारणों, योजनावार खर्च और आगे की कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है। इन पहलुओं पर संबंधित विभागों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह सामने आ सकेगी।