जामताड़ा: झारखंड के जामताड़ा जिले के करमाटांड़ प्रखंड में शिक्षिका की नौकरी दिलाने के नाम पर 500 से अधिक शिक्षित बेरोजगार महिलाओं और युवतियों से कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि ‘लाइफ चाइल्ड वेलफेयर एजुकेशन सोसाइटी’ ने प्रत्येक अभ्यर्थी से 15 हजार रुपये वसूले। इस आधार पर कुल रकम 75 लाख रुपये से अधिक होने का दावा किया जा रहा है। पीड़ित महिलाओं ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर उनकी राशि वापस दिलाने की मांग की है।

नौकरी और मानदेय का दिया गया था आश्वासन

पीड़ित महिलाओं के अनुसार, संस्था की ओर से गांवों में बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षिका के पद पर नियुक्ति देने और हर महीने 3,500 रुपये मानदेय देने का आश्वासन दिया गया था। महिलाओं का भरोसा जीतने के लिए कथित तौर पर चयन पत्र, उपस्थिति पंजिका, बैनर, किताबें, स्लेट और पेंसिल जैसी शैक्षणिक सामग्री भी उपलब्ध कराई गई।

आरोप है कि शुरुआत में कुछ महिलाओं को एक-दो महीने तक मानदेय दिया गया, लेकिन बाद में भुगतान बंद कर दिया गया। इसके बाद महिलाओं को ठगी की आशंका हुई और उन्होंने मामले को प्रशासन के सामने उठाना शुरू किया।

बिहार निवासी व्यक्ति पर भी आरोप

इस मामले में बिहार निवासी धीरज कुमार गुप्ता का नाम सामने आया है। आरोप है कि उन्होंने विभिन्न गांवों में केंद्रों का उद्घाटन किया और महिलाओं को नियमित भुगतान का भरोसा दिलाया। पीड़िताओं का कहना है कि बाद में उन्होंने फोन उठाना भी बंद कर दिया।

तेतुलबंधा गांव की आंगनबाड़ी सेविका अनिता कुमारी ने भी संस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। बताया गया है कि उन्हें दिया गया 1.25 लाख रुपये का चेक बाउंस हो गया, जिसके बाद संदेह और गहरा गया।

सरकारी कर्मियों और कार्यालय के इस्तेमाल पर भी सवाल

संस्था की गतिविधियों में कुछ सरकारी कर्मियों की कथित भूमिका और कार्यालय के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। करमाटांड़ प्रखंड के कई गांवों की महिलाएं इस मामले से प्रभावित बताई जा रही हैं।

उपायुक्त ने दिया कार्रवाई का भरोसा

जामताड़ा के उपायुक्त आलोक कुमार ने मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि शिकायत के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के अनुसार दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

फिलहाल, पीड़ित महिलाओं को प्रशासनिक जांच और न्याय मिलने की उम्मीद है। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और कथित रूप से वसूली गई राशि की वापसी के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है।