जामताड़ा: किशोर-किशोरियों के बीच लैंगिक समानता, शिक्षा, सम्मानजनक व्यवहार और बाल विवाह की रोकथाम को लेकर जामताड़ा में जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। बुधवार को समाहरणालय परिसर से उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आलोक कुमार ने नुक्कड़ नाटक दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

स्कूलों और गांवों में चलेगा जागरूकता अभियान

उपायुक्त आलोक कुमार ने कहा कि किशोर-किशोरियों में सकारात्मक सोच, समानता और एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना स्वस्थ और सशक्त समाज के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी के जरिए बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।

उन्होंने संबंधित टीम को जिले के विद्यालयों और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया।

चार प्रखंडों के स्कूलों और गांवों तक पहुंचेगा संदेश

आईसीआरडब्ल्यू (ICRW) द्वारा संचालित कार्यक्रम के तहत जामताड़ा जिले के नारायणपुर, जामताड़ा, नाला और करमाटांड़ प्रखंड के चयनित विद्यालयों एवं गांवों में नुक्कड़ नाटक के जरिए जागरूकता फैलाई जाएगी।

नुक्कड़ नाटक दल अपनी रचनात्मक और संवादात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से किशोर-किशोरियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और ग्रामीणों को लैंगिक समानता और बाल अधिकारों के प्रति जागरूक करेगा।

भेदभाव खत्म करने और शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर

अभियान के दौरान लड़के और लड़कियों के बीच भेदभाव खत्म करने, शिक्षा को बढ़ावा देने, सम्मानजनक व्यवहार अपनाने और बच्चों के लिए सुरक्षित एवं समावेशी वातावरण तैयार करने का संदेश दिया जाएगा।

इसके साथ ही लोगों को बाल विवाह के सामाजिक और व्यक्तिगत दुष्परिणामों की जानकारी दी जाएगी। कम उम्र में विवाह रोकने में परिवार और समुदाय की भूमिका को भी रेखांकित किया जाएगा।

समाहरणालय में कलाकारों ने दी प्रस्तुति

अभियान की शुरुआत के मौके पर नुक्कड़ नाटक दल ने समाहरणालय परिसर में प्रस्तुति देकर बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता का संदेश दिया। कलाकारों ने नाटक के माध्यम से लोगों से बच्चों को शिक्षा दिलाने और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने में सहयोग करने की अपील की।

इस अवसर पर संबंधित संस्था के सदस्य और अन्य कर्मी मौजूद रहे। अधिकारियों ने कहा कि अभियान का उद्देश्य विद्यालयों और ग्रामीण क्षेत्रों तक जागरूकता पहुंचाकर बाल विवाह की रोकथाम और लैंगिक समानता को बढ़ावा देना है।