हजारीबाग: हजारीबाग के हुरहुरू स्थित कैंटोनमेंट मौजा की खास महल जमीन का विवाद एक बार फिर चर्चा में है। सितंबर में प्रशासन की ओर से पीसीसी सड़क और शेड हटाने की कार्रवाई के बाद अब उसी विवादित स्थल पर पक्की बाउंड्री वॉल के निर्माण की गतिविधि सामने आने का दावा किया जा रहा है। निर्माण से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद जमीन की वर्तमान स्थिति और प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

यह मामला पूर्व मंत्री योगेंद्र साव से जुड़े जमीन विवाद से संबंधित है। एक ओर जमीन के सरकारी खास महल दर्जे और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक पक्ष है, वहीं दूसरी ओर इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया भी जारी है।

बताया गया है कि झारखंड हाईकोर्ट ने 5 अक्टूबर 2026 को संबंधित जमीन पर बने ढांचों को तोड़ने की आगे की कार्रवाई पर अगले आदेश तक अंतरिम रोक लगाई थी। ऐसे में अब निर्माण की गतिविधि सामने आने के बाद यह जानना महत्वपूर्ण हो गया है कि काम किस आधार पर किया जा रहा है और संबंधित विभागों को इसकी जानकारी है या नहीं।

बुलडोजर कार्रवाई के बाद फिर निर्माण की चर्चा

सितंबर में प्रशासनिक टीम पुलिस बल और जेसीबी के साथ संबंधित स्थल पर पहुंची थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उस दौरान वहां बनी पीसीसी सड़क और गौशाला के शेड को हटाया गया था। कार्रवाई के समय जमीन के खास महल दर्जे, राजस्व अभिलेखों और पुनर्ग्रहण की प्रक्रिया को लेकर विवाद सामने आया था।

अब उसी स्थल पर पक्की बाउंड्री वॉल बनाए जाने की सूचना ने मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है। यदि निर्माण उसी विवादित जमीन पर हो रहा है, तो निर्माण की अनुमति, जमीन के रिकॉर्ड और लागू प्रशासनिक आदेशों की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।

हाईकोर्ट के स्टे का क्या है दायरा?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट के 5 अक्टूबर के अंतरिम आदेश में संबंधित जमीन पर मौजूद ढांचों को तोड़ने की आगे की कार्रवाई स्थगित रखने का निर्देश दिया गया था। इस अंतरिम आदेश को जमीन के मालिकाना हक पर अंतिम फैसला या नई बाउंड्री वॉल बनाने की स्पष्ट अनुमति नहीं माना जा सकता।

हालांकि, केवल निर्माण का वीडियो सामने आने से अदालत के आदेश का उल्लंघन स्वतः साबित नहीं होता। इसके लिए आदेश की प्रमाणित प्रति, संबंधित जमीन की पहचान और निर्माण की प्रकृति का मिलान करना आवश्यक है।

प्रशासन से उठ रहे हैं ये सवाल

निर्माण की गतिविधि सामने आने के बाद कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं:

  • क्या जिला प्रशासन और खास महल कार्यालय को निर्माण की जानकारी है?

  • क्या यह पुरानी संरचना की मरम्मत है या नया निर्माण किया जा रहा है?

  • संबंधित जमीन के लीज और राजस्व अभिलेखों में वर्तमान स्थिति क्या है?

  • क्या निर्माण के लिए कोई अनुमति ली गई है?

  • क्या जमीन से संबंधित कोई अन्य प्रशासनिक या न्यायिक निर्देश लागू है?