हजारीबाग की बदहाल सड़क पर मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की का पलटवार, सांसद-विधायकों से पूछा- जनता के हक पर आवाज क्यों नहीं
हजारीबाग: हजारीबाग की बदहाल सड़कों को लेकर पूछे गए सवाल पर कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने स्थानीय सांसद और विधायकों की भूमिका पर सवाल खड़े किए। हजारीबाग परिसदन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जनता अपने प्रतिनिधियों को वोट देकर सदन तक भेजती है, इसलिए क्षेत्र की समस्याओं और जनता के अधिकारों को लेकर आवाज उठाना भी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। पत्रकारों ने मंत्री से हजारीबाग की खराब सड़कों और आम लोगों को हो रही परेशानियों को लेकर सवाल किया। इस पर मंत्री ने सड़क की समस्या के साथ-साथ चुने हुए जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि जनता अपने सांसद और विधायक को चुनकर सदन में भेजती है। ऐसे में जब राज्य या जनता के अधिकार से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण मुद्दा सामने आता है तो जनप्रतिनिधियों को जनता की आवाज बनकर उसे उचित मंच पर उठाना चाहिए। मंत्री ने केंद्र की नीतियों और झारखंड के हितों से जुड़े मुद्दों पर हजारीबाग के भाजपा सांसद और विधायकों की भूमिका पर सवाल उठाया। उन्होंने सवाल किया कि यदि झारखंड के हित प्रभावित हो रहे हैं तो यहां से चुने गए जनप्रतिनिधि अपनी आवाज क्यों नहीं उठा रहे हैं। मंत्री के बयान को हजारीबाग के भाजपा सांसद और विधायकों पर सीधे राजनीतिक हमले के तौर पर देखा जा रहा है। बातचीत के दौरान शिल्पी नेहा तिर्की ने MMDR बिल में संशोधन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि संशोधन के कारण झारखंड को करीब 22 हजार करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हो रहा है। मंत्री ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है। ऐसे में राज्य के आर्थिक हितों से जुड़े फैसलों पर जनप्रतिनिधियों को अपनी बात मजबूती से रखनी चाहिए। मंत्री ने कहा कि अगर यह राशि झारखंड को मिलती तो इसका इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क निर्माण और मंईयां सम्मान योजना जैसी योजनाओं में किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता महंगाई और आर्थिक दबाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में राज्य के राजस्व को प्रभावित करने वाले फैसलों का असर आम लोगों पर भी पड़ता है। परिसीमन के मुद्दे पर मंत्री ने इसे झारखंड के लिए संवेदनशील विषय बताया। उन्होंने कहा कि पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों और आदिवासी प्रतिनिधित्व की सुरक्षा जरूरी है। मंत्री ने हाल में मोरहाबादी मैदान में हुए बड़े जनसमागम का भी जिक्र किया और कहा कि झारखंड की चिंताओं और आवाज को दिल्ली तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। हजारीबाग की सड़क की समस्या को लेकर शुरू हुई बातचीत में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही से लेकर MMDR संशोधन और परिसीमन जैसे बड़े राजनीतिक मुद्दे उठा दिए।सड़क की बदहाली पर सवाल, जनप्रतिनिधियों पर पलटवार
'अपने आलाकमान के सामने चुप क्यों?'
MMDR संशोधन पर ₹22 हजार करोड़ नुकसान का दावा
'यह पैसा मिलता तो शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क पर खर्च होता'
परिसीमन को लेकर भी उठाई आवाज
मंत्री के बयान के बाद सियासी हलचल















