धनबाद: पूर्वी टुंडी प्रखंड के पोखरिया स्थित पेमिया ऋषिकेश अनाथ विद्यालय में बच्चों के स्वास्थ्य और देखभाल को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। विद्यालय में रहने वाले करीब 50 अनाथ बच्चों में से 42 बच्चों के खुजली से पीड़ित होने की जानकारी सामने आई है। विद्यालय के वार्डन उपेंद्र शर्मा की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार होने से उनकी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब विद्यालय प्रबंधन पर नौ वर्षीय छात्र जोसेफ किस्कू को उसके अभिभावक की गैरमौजूदगी में घर के बाहर छोड़ने का आरोप लगा। इस घटना के बाद बच्चों की देखभाल और विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी को लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी सामने आई है।

42 बच्चों के खुजली से पीड़ित होने की जानकारी

जानकारी के अनुसार, पेमिया ऋषिकेश अनाथ विद्यालय में करीब 50 बच्चे रहते हैं। इनमें से लगभग 42 बच्चों के खुजली से पीड़ित होने की बात सामने आई है। इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के प्रभावित होने से उनकी साफ-सफाई, स्वास्थ्य देखभाल और उपचार की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए संबंधित विभाग और जिला प्रशासन की ओर से मामले की जांच तथा आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत है। हालांकि, बीमारी के कारण और बच्चों की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

नौ वर्षीय छात्र को घर के बाहर छोड़ने का आरोप

मामले में नौ वर्षीय छात्र जोसेफ किस्कू को उसके अभिभावक की अनुपस्थिति में घर के बाहर छोड़ने का आरोप भी सामने आया है। बताया गया कि बच्चे के अभिभावक बबलू मरांडी इलाज कराने के लिए रांची गए हुए थे।

जब बबलू मरांडी वापस लौटे, तो ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि बच्चा इधर-उधर भटक रहा था। इसके बाद उन्होंने विद्यालय के वार्डन उपेंद्र शर्मा से संपर्क किया। आरोप है कि वार्डन ने इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।

परिजनों की ओर से विरोध जताए जाने के बाद वार्डन ने कथित तौर पर बताया कि बच्चों ने ही जोसेफ को उसके घर छोड़ा था। इस घटना ने विद्यालय में बच्चों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

विद्यालय में बच्चों के स्वास्थ्य और देखभाल से जुड़े इन मामलों के सामने आने के बाद जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग उठ रही है। बच्चों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना, उनकी साफ-सफाई सुनिश्चित करना और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।

फिलहाल, मामले में विद्यालय प्रबंधन की भूमिका, बच्चों के स्वास्थ्य की स्थिति और छात्र को घर के बाहर छोड़े जाने की परिस्थितियों की आधिकारिक जांच की जानकारी सामने नहीं आई है। संबंधित विभाग की जांच और कार्रवाई के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।